रांची : विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति सहित नेता प्रतिपक्ष मामले को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई। मामले में झारखंड विधानसभा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की।
उनकी ओर से कोर्ट को कहा गया कि नेता प्रतिपक्ष के लिए बीजेपी ने नाम नहीं दिया है। इस पर भाजपा की ओर से कहा गया पहले ही नेता प्रतिपक्ष के नेता के लिए बाबूलाल मरांडी का नाम दिया जा चुका है। इस पर कपिल सिब्बल की ओर से कहा गया की बाबूलाल मरांडी जेवीएम पार्टी से जीत कर आए थे, भाजपा के साथ उनके मर्जर के मामले में अभी तक विधानसभा स्पीकर का कोई निर्णय नहीं आया है। नेता प्रतिपक्ष के लिए ऐसे व्यक्ति का नाम दिया जाना चाहिए जो बीजेपी की सिंबल से लड़ा हो और जीता हो।
उन्होंने कहा कि विधानसभा के बिजनेस में हाई कोर्ट इंटरफेयर नहीं कर सकता। सुभाष देसाई बनाम स्पीकर महाराष्ट्र का जिक्र करते हुए भाजपा की ओर से कहा गया की राजनीतिक पार्टी का एकाधिकार है कि वह किसे विधायक दल का नेता बनाती है। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा गया चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर और लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए शीघ्र बैठक होगी। विधानसभा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता अनिल कुमार ने पैरवी की।










