विश्व बंधुत्व दिवस के आयोजन के क्रम में 8 सितंबर को अपराह्न 5:00 बजे विवेकानंद केंद्र, रांची और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के संयुक्त तत्वाधान में विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए महामहिम राज्यपाल, झारखंड सीपी राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन एवं संस्कृति के अंतर्गत व्याप्त वैश्विक भातृत्व की चर्चा करते हुए कहा कि यहां की संस्कृति के जड़ में हिंदुत्व है तथा वसुधैव कुटुंबकम यानी संपूर्ण विश्व को अपने परिवार के रूप में मानने की हमारी परंपरा रही है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे विरले व्यक्तित्व धरती पर कभी-कभी ही अवतरित होते हैं। उन्हें अपने हिंदू होने का गर्व था और उन्होंने भारतीय धर्म संस्कृति को संपूर्ण विश्व में बहुत हीं ऊंचा स्थान दिलाया। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि स्वामी जी ने शांति, भातृत्व एवं वैश्विक स्वीकार्यता पर जोर दिया। सचमुच आज जलवायु परिवर्तन, असमानता, निर्धनता, आपसी बैमनस्य की जो चुनौतियां संपूर्ण विश्व में है, उसे सामूहिक प्रयास से दूर करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि स्वामी जी के करुणा एवं सहनशीलता के बताएं मार्गों पर चलकर हम सब एक बेहतर विश्व का निर्माण कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में संलग्न एवं विशेष रूप से पाकिस्तान से प्रताड़ित हिंदु परिवारों के पुनर्वास में सक्रिय रूप से कार्यरत, प्रखर वक्ता डॉ ओमेंद्र रत्नु ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व बंधुत्व एकतरफा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा की बी रेडी टू फाइट फॉर योर राइट। अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार रहें उन्होंने बताया कि नागरिकता विधेयक निश्चित तौर पर आशा की किरण बनकर आई है। उन्होंने बताया कि 720 से लेकर 1950 तक का लगभग 500 वर्षों से भी ज्यादा हिंदुओं का इतिहास रहा है। dr श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने स्वागत संबोधन करते हुए कहा कि हालांकि भारत को राजनैतिक स्वतंत्रता 1947 में प्राप्त हो गई थी परंतु वह विवेकानंद ही थे जिन्होंने भारतीयों की आत्मा को जागृत किया था।
वह 11 सितंबर 1893 का दिन था जब स्वामी विवेकानंद ने भारतीयों की आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हुए शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में भारत को दुनिया के सामने रखते हुए कहा था, हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकारते है। उन्होंने आगे कहा कि , मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिकता का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिकता , सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य का रूप में स्वीकारते है।-केंद्र के संरक्षक श्री विनोद गाडियान द्वारा केंद्र परिचय कराया गया तथा सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया गया। इस अवसर पर गीत एवं शांति पाठ का भी आयोजन किया गया। नगर सह संचालक श्री जयंत कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन एवं डॉ परिणीता सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। यह कार्यक्रम परम पूज्य स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो व्याख्यान के स्मरण उत्सव के रूप में आयोजित किया गया।










