श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय और हेरीटेज सोसायटी, पटना के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय ट्राइबल हेरिटेज आज संपन्न हो गया। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि यह दो दिवसीय ट्राइबल कॉन्क्लेव अपने सार्थक निष्कर्षों तक पहुंचने में सफल रहा। यह निश्चित है कि आगामी चौथे कॉन्क्लेव तक यह राष्ट्रीय परिदृश्य में अपना संदेश देने में कामयाब हो जाएगा। आगे उन्होंने कहा कि जनजातीय अपनी विरासत को संरक्षित करने की कला में काफी पारंगत हैं और यह हमारी विरासत को न केवल सुरक्षित रखेंगे बल्कि उसे आनेवाली पीढ़ी तक स्थानांतरित भी करेंगे।

इसके उपरांत कुलपति dr तपन कुमार शांडिल्य और अन्य अतिथियों के द्वारा अपना रिसर्च प्रस्तुत करने वाले विद्वानों, प्रतिभागियों और विशेषज्ञों को प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो संजय पासवान ने कहा कि हमारी संस्कृति और धरोहर को बचाने की आवश्यकता है जो कि हेरीटेज सोसायटी कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्सव के आयोजन में उमंग होना चाहिए न कि उन्माद। इस अवसर पर प्रोफेसर नरेश कुमार वत्स, प्रो. राजकुमार वर्मा, मधु मंसूरी हसमुख एवं हेरीटेज सोसायटी के महानिदेशक डॉ. अनन्ताशुतोष द्विवेदी सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। भारत के बाहर के कई विद्वानों ने भी अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। उन देशों ने नेपाल, जर्मनी, बांग्लादेश, नीदरलैंड आदि प्रमुख हैं। भरतबके प्रमुख राज्यों में उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली के भी कई विद्वानों ने जनजातीय धरोधर विषयक शोध पत्र विद्वानों के समक्ष रखें। उड़ीसा के विद्वान डॉ. अजय कुमार सेठी का जगन्नाथ एवं जनजातीय संस्कृति विषयक शोध को विद्वानों ने खूब सराहा। यह j यह जानकर प्रो पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी।










