आज डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि हिंदी ने हमें दुनियाभर में पहचान दिलाई है। भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई देशों में हिंदी बोली जाती है। हिंदी भाषा भारत के बाहर 20 से अधिक देशों में बोली जाती है। हिंदी का महत्व इस बात से पता चलता है कि आज देश में डॉक्टरी और इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कई संस्थानों में हिंदी माध्यम में होने लगी है। एमबीबीएस व बीटेक की किताबें हिंदी में आने लगी हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग हिंदी का इस्तेमाल करने लगे हैं।उन्होंने आगे कहा कि हिंदी महज भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान है। हिंदी बोलें, रोजमर्रा के व्यवहारिक जीवन में अमल में लाएं, हिंदी सीखें और सिखाएं।

उन्होंने अपने भाषण का समापन इन पक्तियों के साथ किया,
बाकी भाषा को मैंने महज किताबों में रखा,
हिंदी को सब जगह अपने भावों में रखा।
हिंदुस्तान की जान है हिंदी, देश की पहचान है हिंदी सात समंदर पार भी… हिंदुस्तान की शान है हिंदी।
मुख्य वक्ता प्रसिद्ध साहित्यकार श्री महादेव टोप्पो ने हिन्दी को रोजगार परक भाषा बताते हुए कहा कि आप हिन्दी के माध्यम सेअनुवादक,उदघोषक और पत्रकार बन सकते हैं। उन्होंने फादर कामिल बुल्के को सच्चा हिन्दी सेवी बताया। इससे पहले हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ जिन्दर सिंह मुण्डा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की भाषाई विविधताओं को जोड़ने में हिन्दी एक कड़ी के रूप में काम करती है। दुनिया की सभी समृद्ध भाषाओं के शब्द हिन्दी में शोभायमान हैं। हिन्दी महज भाषा नहीं वरन् भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक सेतु भी है। डॉ वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आर से आमंत्रित प्रो डॉ नीरज कुमार ने हिन्दी दिवस पर अपनी बात रखी। डॉ बिनोद कुमार ने कहा कि हिन्दी के विकास में क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं की अहम भूमिका है। कार्यक्रम का संचालन डॉ जितेन्द्र सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ मृत्युंजय कोईरी ने किया। इस कार्यक्रम की सफलता में शोधार्थी संजय कुमार साहू, नीतेश, अनुष्का, आलोक,विधान, मनीष समेत सभी विद्यार्थियों की सराहनीय भूमिका रही।










