आज दिनांक 14 सितंबर को Dr श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में करम महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित थे और उनके द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता की गई । विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रो dr सत्यनारायण मुंडा, पूर्व कुलपति, डीएसपीएमयू, प्रो dr अंजनी कुमार श्रीवास्तव, लोकपाल, डीएसपीएमयू, लोक कलाकार पद्मश्री मधु मंसूरी , पद्मश्री मुकुंद नायक, वरिष्ठ साहित्यकार महादेव टोप्पो आदि उपस्थित थे। सभी माननीय अतिथियों का सम्मान और स्वागत अंग वस्त्र भेंट कर किया गया।क्षेत्रीय भाषा के समन्वयक और खोरठा विभागाध्यक्ष प्रो विनोद कुमार के द्वारा स्वागत भाषण दिया गया । इसके बाद विभाग के विद्यार्थियों द्वारा गीत प्रस्तुत किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति dr तपन कुमार शांडिल्य ने आदिवासी मूलवासी की मातृभाषा के समक्ष कई चुनौतियों की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि शिक्षित परिवार विशेष तौर पर शहर के लोग अपने घर में मातृभाषा में संवाद करें उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि मातृभाषा हमारी संस्कृति की धरोहर है। इसे सुरक्षित रखने के लिए हर गांव में अखड़ा निर्माण कराने और झारखंड के सभी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में इन भाषाओं की पढ़ाई और लोक संस्कृति को बचाने पर विशेष ध्यान दिए जाने की अवशयकता है। उन्होंने कहा कि हमें भी अपने स्तर पर इस पर कार्य करने की आवश्यकता है। कुलपति प्रो तपन कुमार शांडिल्य ने आगे अपने उदबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय में सभी भाषाओं की पढ़ाई होती है। इस त्योहार को ओड़ीसा, बंगाल, छत्तीसगढ़ और असम में मनाया जाता है। यह पर्व हमें संदेश देता है कि हमें मिलकर प्रकृति की रक्षा करनी है ताकि प्राकृतिक संपदा बनी रहे और विकास बिना पर्यावरणीय क्षति के हो।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस पर्व के माध्यम से प्रकृति और पर्यावरण को संरक्षित करने की अनमोल विरासत झारखंड की धरती को प्राप्त है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इसे ध्यान में रखते हुए एक प्राकृतिक संतुलित जीवन शैली को अपनाया जाए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि प्रकृति के इस पर्व पर संतुलन बनाए रखने के लिए करम त्योहार हमें सबसे सटीक संदेश देता है। मौके पर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो dr सत्यनारायण मुंडा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें झारखंड की संस्कृति को आगे की ओर ले जाने के साथ उसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। धन्यवाद ज्ञापन प्रो रामदास उरांव के द्वारा किया गया। अंत में जनजातीय विभाग द्वारा परंपरागत परिधानों के साथ नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर dr अंजनी कुमार श्रीवास्तव,dr सर्वोत्तम कुमार, dr जिंदर सिंह मुंडा, जय किशोर मंगल, डुमनी मुर्मू के अलावा जनजातीय विभाग के शिक्षक, विधार्थियों के अलावा अन्य छात्र– छात्राएं एवम शिक्षक – शिक्षिकाएं उपस्थित थे। यह जानकारी पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी।










