प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहली बार मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत झारखंड में बांग्लादेशी और रोहिंग्या की अवैध घुसपैठ के खिलाफ जांच शुरू की है। यह जांच रांची पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू की गई है, जिसमें छह बांग्लादेशी लड़कियों की तस्करी का मामला दर्ज किया गया था। इन लड़कियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पहचान पत्र और आधार कार्ड प्राप्त करने में मदद की गई थी। ईडी ने इस मामले में बड़े षड्यंत्र और राजनीतिक प्रभावों की जांच करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया है कि वे वोट बैंक की राजनीति के लिए इन अवैध घुसपैठियों का समर्थन कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि इन घुसपैठियों के कारण संथाल परगना और कोल्हान क्षेत्रों की जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है और आदिवासी आबादी घट रही है।

ईडी के अनुसार, अवैध घुसपैठ के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है, जो झारखंड और पश्चिम बंगाल में सक्रिय है। यह सिंडिकेट फर्जी दस्तावेज बनाकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता दिलाने में मदद करता है। ईडी ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों से भी इस सिंडिकेट के बारे में जानकारी जुटाई है। जांच के दौरान, ईडी ने पाया कि इन घुसपैठियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र प्राप्त किए हैं। ईडी अब इस पूरे तस्करी नेटवर्क की मनी ट्रेल की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि इस अवैध गतिविधि से प्राप्त धन का उपयोग कहां किया जा रहा है। ईडी का मानना है कि इस अवैध घुसपैठ के पीछे कुछ राजनीतिक दलों का भी हाथ हो सकता है, जो वोट बैंक की राजनीति के लिए इन घुसपैठियों का समर्थन कर रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही है; कुछ लोग इस कदम की सराहना कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक चाल बता रहे हैं। जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में इस मुद्दे को लेकर उत्साह और उमंग की लहर है। लोग प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के विकास और सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि मोदी का सेवा और समर्पण का दृष्टिकोण देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। ईडी का कहना है कि इस अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। जनता की सुरक्षा और देश की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए यह जांच महत्वपूर्ण है।










