रांची. झारखंड शराब व्यापारी संग ने आज एक प्रेस वार्ता कर वर्तमान में झारखंड में जो शराब की बिक्री छत्तीसगढ़ की एजेंसी द्वारा की जा रही है, इसको लेकर एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करते हुए, इसकी ऑडिट व जांच की मांग की है। शराब व्यापारी संघ का कहना है कि कहीं ना कहीं झारखंड में भी अगर इसकी जांच होगी तो ये दिल्ली शराब घोटाला जैसा ही एक घोटाला है, जिससे राज्य सरकार को सैकड़ों करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। आखिर इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा। क्या जिस अधिकारी के कारण राजस्व का नुकसान हुआ है, सरकार उसे दंडित करने का काम करेगी। ये कहना है झारखंड शराब व्यापारी संघ के महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल का। साथ ही उन्होंने सरकार से पूछा है कि आखिर कोई प्लेसमेंट एजेंसी बिना बैंक गारंटी के विगत साढ़े 4 महीने से कैसे काम कर रही है। जबकि नियम कहता है कि 48 घंटे के भीतर अगर संबंधित एजेंसी या संस्थान द्वारा बैंक गारंटी नहीं दिया जाता है, तो उसे काम करने का अधिकार नहीं है।
साथ ही शराब व्यापारी संघ के महासचिव ने सरकार से मांग की है कि सरकार छत्तीसगढ़ की एजेंसी को हटाकर फिर से पुरानी व्यवस्था स्थापित करे और पुरानी व्यवस्था द्वारा तकरीबन 3500 करोड़ के राजस्व का propose आफर टारगेट संघ के द्वारा दिया गया है। अब ये देखने वाली बात होगी कि सरकार झारखंड शराब व्यापारी संघ के आरोपो और मांगों पर ध्यान देते हुए इसकी जांच कराएगी या नहीं।
शराब व्यापारी संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार को ऐसी कौन सी मजबूरी है जो बिना बैंक गारंटी के साढ़े चार महीने से प्लेसमेंट एजेंसी काम कर रही है। राज्य में मनमाने ढंग से ओवरप्राइसिंग पानी मिला हुआ दो नंबर की शराब आए दिन मिल रही है, इसकी जवाबदेही किसकी है? किस अधिकारी के आदेश से बिना बैंक गारंटी के ही काम कर रही है। राज्य के मुख्य मंत्री एवं उत्पाद मंत्री से संघ मांग करती है कि आदेश देने वाले अधिकारी की जांच होनी चाहिए, नहीं तो संघ सीबीआई ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ एवं विजिलेंस से जांच करने की मांग करेगी। संघ ने कहा कि किस अधिकारी के आदेश से साढ़े चार महीना बिना बैंक गारंटी के काम प्लेसमेंट एजेंसी राज्य में कर रही है। जबकि प्लेसमेंट एजेंसी की बैंक गारंटी 48 करोड़ ही जमा था और उसको उत्पाद विभाग द्वारा जप्त कर लिया गया है। सवाल उठता है कि 48 घंटा के अंदर ही टॉपऑप डालना रहता है, लेकीन आज तक बीना बैंक गारंटी के ही एजेंसी छत्तीसगढ़ के काम कर रही है, यह क्या उचित है?
शराब व्यापारी संघ ने कहा कि ऐसी कौन सी मजबूरी रही कि एक वर्ष भी पूरा अभी नहीं हुआ, लेकिन उत्पाद कमिश्नर 5 बार चेंज किया गया है। इससे खुद वा खुद समझा जा सकता है कि उत्पाद सचिव कि बात को ध्यान ना देना, जिसको लेकर ट्रान्सफर कर दिया जा रहा है। एक उत्पाद कमिश्नर तो मात्र 2 महीना ही रहे। मुख्यमंत्री सोरेन से संघ आदर भाव से मांग करता है कि उत्पाद सचिव से पूछा जाना चाहिए कि 2022-23 शराब नीति कैसे असफल हुई और बीना बैंक गारंटी के कैसे प्लेसमेंट एजेंसी अभी तक लक्ष्य पूरा भी नहीं किया और काम कर रही है? जैसे होलसेल संचालन का काम जेएसबीसीएल को बीच में ही दे दिया गया, उसी प्रकार से शराब दुकान का भी संचालन जेएसबीसीएल को ही दे देना चाहिए था (एजेंसी के बैंक गारंटी खत्म होने के बाद)। संघ पिछले वर्ष भी 2300 करोड़ कि लिखित दिया था। उत्पाद मंत्री के आवास पर उत्पाद सचिव भी थे। उन्होंने कहा भी था कि मैं देखता हूं पर आज तक देखते ही रह गये। हमलोग भी आज देख रहे है 450 करोड़ पीछे चल रहा है राजस्व क्या इसकी भरपाई कंसल्टेंसी छत्तीसगढ करेंगी या सचिव महोदय करेगें?
शराब व्यापार संघ ने कहा कि संघ, राज्य के मुख्यमंत्री एवं उत्पाद मंत्री से मांग करती है कि एक्साइज विभाग को अनेक्साइज में बदलाव ना कर एक्साइज ही रहने दिया जाएं, जिससे राज्य सरकार के खजाने में राजस्व एडवांस आ जाए और राज्य के शराब व्यापारी सुचारुरूप से दुकान चला सके। सरकार को सुरक्षित राशि की ओर ध्यान देना चाहिए ना कि असुरक्षित की ओर जाना चाहिए। अब सरकार ध्यान दे राज्य कि जानता आपके साथ है। जल्द से जल्द झारखंड के अधिकारियों एवं शराब व्यापारी के साथ विचार विमर्श कर शराब नीति में बदलाव करने की जरूरत है। अब प्रयोगशाला नहीं बनाया जाय, पहले कि सरकार भी प्रयोग कर चुकी थीं और अभी की सरकार कर के देख लिया। अब जिसका व्यापार है उनको ही करने दिया जाए। सरकार का काम शराब बेचना नहीं है। व्यापारी ही व्यापार कर सकता है। हम झारखण्ड के रहने वाले शराब व्यापारी झारखण्डी व्यापारी जो शराब से जुड़े हुए थे, वह वंचित हो चुके हैं। उन्हें वापस लाने की जरूरत है, जिससे राज्य हित में राजस्व की विशुद्ध राज्य के खजाने में जमा हो सके।









