दिनांक 23 सितम्बर 2024 को 2:00बजे स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की116वीं जयंती के अवसर पर एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो तपन कुमार शांडिल्य ने अपने संबोधन में कहा कि दिनकर जी हिन्दी ही नहीं बल्कि इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति शास्त्र सबके अध्येता थे। भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी दिनकर जयंती मनायी जा रही है। दिनकर पथ प्रदर्शक कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से सोए हुए भारतीयों को जगाया। उन्होंने कहा कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति मरणोपरांत जीना चाहता है अर्थात अमर होना चाहता है। दिनकर को समझने के लिए आज के युवाओं को उनकी निम्न पंक्तियों का सार समझना आवश्यक हो जाता है,
मरणोपरांत यदि जीने की है चाह तुझे,
तो सुन बतलाता हूं सीधी राह तुझे।
लिख कुछ ऐसी चीज की दुनिया डोल उठे,
या कर कुछ ऐसा काम जमाना बोल उठे।
अतिथियों का स्वागत करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ जिन्दर सिंह मुण्डा ने कहा कि दिनकर जी मनुष्य और मनुष्यता के स्वर को मजबूती दी।उनकी कविताएं युद्ध के विध्वंस के बीच शांति का पैगाम लेकर आती है। साथ ही समानता की बात करती है। खोरठा विभागाध्यक्ष डॉ बिनोद कुमार ने कहा कि दिनकर की कविताएं जनमानस को झकझोरती हैं।डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि दिनकर जी की कविताएं बाल मनोविज्ञान पर भी ताकीद करती है। इस अवसर पर हिन्दी विभाग के छात्र ऋषभ देव ने भी कविता सुनाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ मृत्युंजय कोईरी ने किया। इस आयोजन की सफलता में चांदनी अभिनव, सुजीत समेत सभी विद्यार्थियों की सराहनीय भूमिका रही। यह जानकारी पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी।











