जनवरी 2026 में ईरान एक बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। आर्थिक बदहाली और महंगाई से तंग आ चुके लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन की शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां दुकानदारों ने हड़ताल की, लेकिन जल्द ही यह पूरे देश में फैल गया। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के आह्वान पर 8 और 9 जनवरी की शाम 8 बजे हजारों लोग एक साथ नारे लगाने लगे। तेहरान के विभिन्न इलाकों में “तानाशाह मुर्दाबाद”, “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद” और “पहलवी वापस आएंगे” जैसे नारे गूंजे। प्रदर्शनकारियों ने शाह के समर्थन में भी आवाज उठाई, जो पहले मौत की सजा का कारण बन सकता था। सरकार ने जवाब में पूरे देश में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल्स बंद कर दीं, ताकि जानकारी बाहर न जाए।

प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक मुद्दों से शुरू हुए, लेकिन अब यह सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता के खिलाफ हो चुके हैं। कई शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए। रेजा पहलवी ने विदेश से अपील की कि ईरानी एकजुट होकर अपनी आजादी की मांग करें। उन्होंने सुरक्षा बलों से भी लोगों का साथ देने की गुजारिश की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर निर्दोष लोगों को मारा गया तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। वहीं, रूस और कुछ अन्य देशों ने इसे आक्रमण बताया।
यह प्रदर्शन 2022-23 के महिला-जीवन-आजादी आंदोलन से अलग हैं, जहां फोकस सामाजिक सुधार पर था। अब लोग रिजीम चेंज की मांग कर रहे हैं। जेनरेशन जेड के युवा सबसे आगे हैं, जो महसा अमीनी प्रदर्शनों से प्रभावित हैं। सरकार ने कठोर दमन शुरू कर दिया है, लेकिन प्रदर्शन रुकने के बजाय और तेज हो रहे हैं। इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद वीडियो और खबरें बाहर आ रही हैं, जो ईरान में बदलाव की संभावना दिखा रही हैं। विश्व की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह इस्लामिक रिपब्लिक के अंत की शुरुआत है।










