बिहार के लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड से सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ाने वाला एक बेहद संगीन मामला सामने आया है, जिसने अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों अंचल कार्यालय से जुड़े दो अलग-अलग वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पहले वीडियो में अंचल अधिकारी (सीओ) स्वतंत्र कुमार के सरकारी चेम्बर के भीतर एक निजी दलाल को प्रशासनिक कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर सरकारी अभिलेखों के साथ सरेआम छेड़छाड़ करते हुए देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहा शख्स ताजपुर पंचायत के सरपंच अजीत कुमार का भाई चंदन कुमार है। आरोप है कि सीओ के कथित संरक्षण के कारण इस बाहरी व्यक्ति की अंचल कार्यालय में इतनी पैठ है कि वह बेखौफ होकर सरकारी बक्सा खोलता है और राजस्व के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में शामिल ‘रजिस्टर-2’ की फाइल निकालकर उसके पन्ने पलटते और फाड़ते हुए दिखाई दे रहा है।

अंचल कार्यालय के भीतर एक आम नागरिक या निजी व्यक्ति की सरकारी रिकॉर्ड तक ऐसी पहुंच ने अंचल की सुरक्षा और गोपनीयता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। नियमों के मुताबिक, ‘रजिस्टर-2’ एक अति-महत्वपूर्ण और प्रतिबंधित राजस्व अभिलेख है, जिसे डिजिटल स्कैनिंग के बाद आम जनता के सीधे देखने पर भी पूरी तरह रोक है। इस बेहद संवेदनशील दस्तावेज का अवलोकन या रखरखाव केवल अधिकृत विभागीय कर्मचारियों अथवा अंचल अधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है। ऐसे में एक रसूखदार दलाल द्वारा अंचल अधिकारी के कमरे में घुसकर तिजोरी से फाइलें गायब करने या फाड़ने की इस हरकत को स्थानीय लोग और भू-स्वामी एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और जमीन घोटालों की साजिश से जोड़कर देख रहे हैं।

भ्रष्टाचार की कहानी यहीं खत्म नहीं होती; सूर्यगढ़ा अंचल कार्यालय से जुड़ा एक और वीडियो भी सोशल मीडिया पर समानांतर रूप से वायरल हो रहा है, जो यहां पसरे संस्थागत भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। इस दूसरे वीडियो में अंचल कार्यालय का एक कर्मचारी, जिसका नाम अभिषेक कुमार बताया जा रहा है, कैमरे के सामने कथित रूप से अवैध वसूली के नोटों की गड्डियां गिनता नजर आ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी अभिषेक कुमार, अंचल अधिकारी स्वतंत्र कुमार के निजी ड्राइवर और दलालों का एक संगठित सिंडिकेट यहां काम कर रहा है, जो हर छोटे-बड़े म्यूटेशन और जमीन विवाद के एवज में मोटी रकम वसूलता है। सोशल मीडिया पर इन दोनों वीडियो के व्यापक प्रसार और जनता के भारी आक्रोश के बावजूद, अब तक लखीसराय जिला प्रशासन या वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संबंधित सीओ या दोषी कर्मियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे अंचल कार्यालय की पारदर्शिता पर जनता का विश्वास पूरी तरह उठ चुका है। (नोट: वायरल वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।)











