देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार की राजधानी पटना में जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे बेगुनाह छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज और उन पर दर्ज किए गए मुकदमों को लेकर भाकपा-माले और आइसा ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को आरा स्थित पार्टी कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के जिला कार्यालय सचिव दिलराज प्रीतम, आइसा के जिला सह-सचिव साहिल अरोड़ा, राज्य कमेटी सदस्य वर्षा कुमारी और राज्य परिषद सदस्य राजेश ने संयुक्त रूप से केंद्र व राज्य सरकार के दमनकारी रवैये की तीव्र निंदा की।
प्रेस वार्ता के दौरान छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाने वाले विद्यार्थियों पर पुलिस द्वारा इस तरह से लाठियां बरसाना और बाद में उन्हें झूठे आपराधिक मुकदमों में फंसाना लोकतंत्र का हनन है। नेताओं ने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को इस प्रकार डरा-धमकाकर या कानूनी मुकदमों का भय दिखाकर दबाया नहीं जा सकता। सरकार का यह तानाशाही रवैया छात्र-युवा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ ईंट से ईंट बजाने का काम करेंगे।
सरकार की इस दमनकारी नीति का करारा जवाब देने के लिए आइसा और भाकपा-माले ने व्यापक जनांदोलन का खाका तैयार कर लिया है। प्रेस वार्ता के दौरान नेताओं ने घोषणा की कि इस बर्बरता और झूठे मुकदमों के खिलाफ आगामी 30 जुलाई को आरा की सड़कों पर जोरदार ‘आक्रोश मार्च’ निकाला जाएगा। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासन ने छात्रों पर से सभी झूठे मुकदमे अविलंब वापस नहीं लिए, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।










