नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में हिमनद (ग्लेशियर) टूटने से आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ के बाद मौतों और तबाही का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार को जारी नए आंकड़ों के अनुसार, इस त्रासदी में मरने वालों की कुल संख्या 633 तक पहुँच गई है, जबकि लापता लोगों की संख्या 3,000 के करीब पहुँच रही है। नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अकेले नेपाल में 626 लोगों की जान जा चुकी है और 2,426 लोग लापता हैं, जिनमें 517 विदेशी पर्यटक व नागरिक शामिल हैं। वहीं तिब्बत क्षेत्र में चीन सरकार ने कम से कम 7 लोगों की मौत और 554 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है।

यह भयावह प्राकृतिक आपदा बुधवार की सुबह हिमालय क्षेत्र में लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर के एक हिस्से के ढहने से शुरू हुई। ग्लेशियर का हिस्सा लगभग 1,200 मीटर नीचे गिरकर चट्टानों और मलबे को समेटते हुए सीधे लेंडे नदी से जा टकराया। इसके कारण उत्पन्न हुई भयंकर जलधारा ने दक्षिण की ओर बहते हुए नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भीषण तबाही मचाई। इस जलप्रलय की तीव्रता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज़ 30 मिनट के भीतर त्रिशूली नदी का जलस्तर 9 मीटर (लगभग 30 फीट) तक बढ़ गया। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) ने स्पष्ट किया है कि यह आपदा भूकंप के कारण नहीं, बल्कि ग्लेशियर ढहने से उत्पन्न भूस्खलन के झटकों की वजह से आई थी।

आपदा की विभीषिका और समय की नजाकत को देखते हुए नेपाल सरकार ने भारत और चीन से आपातकालीन तकनीकी मदद की गुहार लगाई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, स्थिति बेहद गंभीर है और कई ज़िंदगियाँ दांव पर लगी हैं, जिसके चलते सुरंग बचाव (Tunnel Rescue) विशेषज्ञों सहित दोनों पड़ोसी देशों से विशेष राहत दल बुलाए गए हैं। बचाव अभियान के चौथे दिन भी लगातार हो रही बारिश और बाढ़ के पानी से बनी अस्थायी झील के कारण दूसरे भूस्खलन की आशंका बनी हुई है, जो राहत कार्यों में भारी बाधा डाल रही है। इस अपार तबाही के बीच कुछ उम्मीद भरी ख़बरें भी सामने आई हैं, जहाँ मलबे के ढेर से 97 वर्ष की एक बुजुर्ग महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।










