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हिंदी केवल भाषा नहीं, हमारी सांस्कृतिक पहचान है! गढ़वा समाहरणालय में हिंदी दिवस पर गूंजीं कविताएं; अधिकारियों और कवियों ने लिया व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प

जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज की अध्यक्षता में भव्य संगोष्ठी संपन्न; उप निर्वाचन पदाधिकारी कुमुद झा, साहित्यकारों और शिक्षकों ने हिंदी की वैश्विक महत्ता पर डाला प्रकाश

September 14, 2026
in Jharkhand, Top News
हिंदी केवल भाषा नहीं, हमारी सांस्कृतिक पहचान है! गढ़वा समाहरणालय में हिंदी दिवस पर गूंजीं कविताएं; अधिकारियों और कवियों ने लिया व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प
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🔸 समाहरणालय गढ़वा में किया गया हिंदी दिवस का आयोजन

🔸 जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा हिंदी एक विशाल महासागर की तरह, कई भाषाओं को करती है समावेश, वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है क्रेज

🔸 बोलचाल व लेखनी में हिंदी भाषा का प्रयोग अधिक से अधिक करने की लोगों से अपील

आज दिनांक 14 सितंबर 2026 को जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज की अध्यक्षता में हिंदी दिवस पर समाहरणालय के सभाकक्ष में संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें उप निर्वाचन पदाधिकारी कुमुद झा, क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी समेत अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षकगण, विद्यार्थीगण, कवि, हिंदी साहित्यकार व अन्य उपस्थित हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला शिक्षा अधीक्षक एवं क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी समेत अन्य मंचासीन पदाधिकारियों द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलित कर एवं सम्मानित गणों को बुके देकर किया गया।

जिला शिक्षा अधीक्षक एवं मौके पर उपस्थित विभिन्न शिक्षकों द्वारा हिंदी दिवस के मौके पर संगोष्ठी में आए सभी लोगों का स्वागत करते हुए हिंदी दिवस मनाने को लेकर इसकी विशेष जानकारी दी गई।

जिला शिक्षा अधीक्षक श्री मिंज ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह वह दिन है जिस दिन भारत की संविधान सभा द्वारा हिंदी को हमारी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था। काफी संघर्ष के बाद हिंदी को हमारे देश की राष्ट्रभाषा घोषित किया गया। हिंदी भाषा को 14 सितंबर 1949 को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था। इसके बाद 1953 में पहली बार राष्ट्रीय हिंदी दिवस के रूप में मनाया गया।

हिंदी दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि हिंदी एक सरल एवं विशाल भाषा है, जिसमें अरबी, उर्दू, फारसी, तुर्की, जापानी, अंग्रेजी, रशियन, चाइनीस, पुर्तगाली आदि कई भाषाओं के शब्दों का समावेश मिलता है। हिंदी को वैश्विक पटल पर और ज्यादा प्रचारित प्रसारित करने के लिए हिंदी भाषा के बोलचाल में शुद्धता बरतते हुए इसके प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक एकता को मजबूती प्रदान करना है।

उपस्थित विभिन्न शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हिंदी दिवस के मौके पर अपने-अपने वक्तव्य में कहा कि 14 सितंबर को पूरे विश्व में हिंदी दिवस के रूप में चिन्हित किया गया है। यह हमारी मातृभाषा है। हिंदी भाषा का प्रसार न सिर्फ भारत देश में बल्कि पूरे विश्व में हुआ है। आज के दौर में विश्व के बड़े-बड़े नेता भी हिंदी में बात करते हैं, जो लोगों के बीच काफी प्रचलित है।

इस मौके पर उप निर्वाचन पदाधिकारी कुमुद झा ने कहा कि जिस प्रकार हम सब अपने-अपने विरासतों एवं संस्कृति को बचाकर रखना चाहते हैं, ठीक उसी प्रकार हमें अपने मातृभाषा हिंदी को भी संयोजित करने की आवश्यकता है। उपस्थित लोगों से हिंदी भाषा का व्यापक प्रचार-प्रचार करने एवं अधिक से अधिक इसे बोलचाल के समय प्रयोग में लाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा प्राचीन काल से बोले जाने वाली भाषा है, जो पूर्व से लेकर आज तक समय अनुसार अपना अन्य भाषाओं के शब्दों को भी अपने में मिलाकर कुछ स्वरूप परिवर्तन करती है परंतु इसका मूल रूप बना रहता है। संविधान सभा द्वारा 14 सितम्बर 1949 को हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया।

हिंदी भाषा के माध्यम से हम अपने भावनाओं, विचारों और भारतीय संस्कृति को समर्थन और सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा के रूप में हमारे दिलों में बसी हुई है और यह एकता और एकत्रितता की भावना को प्रकट करती है। हिंदी भाषा को हमारी भाषा की गरिमा का प्रतीक माना जाता है और हिंदी दिवस हमें इस महत्वपूर्ण भाषा के महत्व को समझाने और मानने का मौका देता है। चूंकि यह हमारी मातृभाषा है। अतः हिंदी के बोलचाल में शर्म की नहीं बल्कि गर्व की अनुभूति होती है।

मौके पर उपस्थित क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी एवं विभिन्न शिक्षकों एवं कवि तथा हिंदी साहित्यकारों द्वारा भी हिंदी दिवस के मौके पर अपने-अपने वक्तव्य रखे गयें, जिसमें हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार करने तथा हिंदी भाषा का प्रयोग करने की बात कही गई एवं हिंदी भाषा की विशेषता पर प्रकाश डाला गया। इस दौरान समारोह में उपस्थित लोगों द्वारा एक से बढ़कर एक शेरों-शायरी व स्वयं रचित कविताएं व गीत भी सुनाई गईं। हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी भाषा की महत्ता व विशेषता के बारे में बताने हेतु कवियों द्वारा मनमोहक प्रस्तुती दी गयी।

वरिष्ठ पत्रकार एवं हिंदी साहित्य कला मंच के अध्यक्ष विनोद पाठक द्वारा भी हिंदी दिवस के मौके पर उपस्थित लोगों का स्वागत किया गया एवं अधिक से अधिक बोलचाल व लेखनी में हिंदी भाषा का प्रयोग करने की अपील की गई।

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