रांची. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और कांसेप्ट ऑफ फिजिक्स के लेखक और प्रसिद्ध शोधकर्ता डॉ. हरिशचंद्र वर्मा ने 10 और 11 मई को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के सभागार में आयोजित दो दिवसीय व्याख्यानमाला के तहत आज पहले दिन My Divine Experience with Academics.. The Joy of Learning विषय पर अपना व्यख्यान दिया। विश्वविद्यालय के IQAC और भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित इस व्याख्यान में प्रो. वर्मा ने काफी रोचक तरीके से विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों के स्वागत और द्वीप प्रज्वलन के साथ किया गया। मुख्य अतिथि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड के सचिव राहुल कुमार पुरवार ने अपने उदबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद विश्वविद्यालय, रांची के द्वारा इस प्रकार के व्याख्यान माला की पहल प्रशंसनीय है, खास तौर पर प्रो. एच सी वर्मा जैसे लब्ध विद्वान से इसकी शुरुआत करना है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी यह अपेक्षा रहेगी कि विश्वविद्यालय इसी तर्ज पर अन्य विषयों के लिए भी इस प्रकार के व्याख्यान माला का आयोजन करे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि शोध और अन्य अकादमिक गतिविधियों को उसकी पूर्णता तक पहुंचाया जाए ताकि उससे संबंधित निष्कर्षों के सार्थक परिणाम निकल कर सामने आए।
मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो एचसी वर्मा ने सरल जीवन शैली का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को काफी रोचक तरीके से विज्ञान के अध्ययन को सामान्य घरेलू प्रयोगों के द्वारा प्रमाणित करने पर बल दिया। उन्होंने अपने द्वारा संचालित किए जानेवाले नेशनल अन्वेशिका एक्सपेरिमेंटल स्किल टेस्ट।NAEST का उल्लेख करते हुए बताया कि यह एक वार्षिक प्रतियोगिता है, जो भौतिकी में एक भारतीय छात्र के उत्सुक अवलोकन कौशल, विश्लेषण कौशल और प्रयोगात्मक कौशल का आकलन और पोषण करती है। इसका आयोजन शिक्षा सोपान के माध्यम से किया जाता है।
इसमें दो समूहों के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है, नवीं कक्षा से 12 वीं के कक्षा तथा स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों के लिए। इसके उपरांत उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि श्रेष्ठ शिक्षक उपलब्ध होने के साथ साथ विद्यार्थियों को भी अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होना चाहिए और अपना शत प्रतिशत देना चाहिए।
कुलपति डॉ. तपन कुमार शांडिल्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इस दो दिवसीय कार्यशाला को अति महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह होना है कि इस लब्ध प्रतिष्ठित, पद्मश्री प्राप्त विद्वान की अकादमिक श्रेष्ठता से न सिर्फ हमारे विश्वविद्यालय के शिक्षक लाभान्वित हो बल्कि अन्य विश्वविद्यालय, महाविद्यालय के सबंधित विषय के शिक्षक और विद्यार्थी के अलावा विद्यालयों के 12 वीं कक्षा के शिक्षक और विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकें।
उन्होंने कहा कि इसलिए यह दो दिवसीय आयोजन किया गया है कि दो दिनों के उपरांत विद्यार्थियों को इस कार्यशाला के माध्यम से न सिर्फ भौतिकी बल्कि विज्ञान से सबंधित नवीन जानकारियां प्राप्त हो सकें। कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स, पटना के भौतिकी विज्ञान के एसोसिएट प्रो। डॉ. संतोष कुमार ने सोपान के द्वारा विद्यार्थियों के हित में संचालित किए जा रहे प्रो एच सी वर्मा के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह देश में अपने तरह का पहला प्रयास है, जिसकी जितनी सराहना की जाए वो कम है।
इससे पूर्व डॉ. जेपी शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। मंच संचालन डॉ. विनय भरत और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभय कृष्ण सिंह ने दिया। मौके पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नमिता सिंह, वित्त पदाधिकारी डॉ. आनंद मिश्रा समेत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के शिक्षक, रांची विश्वविद्यालय के शिक्षक और विश्वविद्यालय तथा विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे। यह जानकारी पीआरओ प्रो. राजेश कुमार सिंह ने दी।









