धनबाद : SNMMCH में मरीजों की जिम्मेवारी सिर्फ डॉक्टर की ही नहीं बल्कि वहां काम कर रहे स्टाफ की भी होती है। चाहे वो संविदा कर्मी हो या फिर वार्ड बॉय, कोयलांचल के सबसे बड़े हॉस्पिटल शहीद निर्मल महतो मेमोरियल हॉस्पिटल में संविदा कर्मियों के लिए जारी किए गए तुगलकी फरमान के खिलाफ पक्ष और विपक्ष दोनों अब समर्थन में उतर गए हैं।
पिछले छह दिनों से आंदोलनरत संविदाकर्मी
कोयलांचल के सबसे बड़े अस्पताल SNMMCH के संविदा कर्मियों को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जारी किए गए फरमान में हुए छटनी के खिलाफ पिछले छह दिनों से आंदोलनरत और अपने कार्यों से बाहर हैं। जिसको लेकर मंगलवार को पक्ष और विपक्ष के दोनों समर्थन में उतरकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए फरमान के खिलाफ आंदोलन का साथ दिया। बता दें की छंटनी किए गए संविदा कर्मी फ्रंटलाइन कंपनी के कर्मी थे। वहीं मासस के नेता अरूप चटर्जी ने इसे सरकार का तुगलकी फरमान बताया तो वहीं भाजपा नेत्री रागनी सिंह ने सरकार पर संविदा कर्मियों के पर अत्याचार और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाई है।
हड़ताल से मरीजों की बढ़ी परेशानी
बता दें कि हड़ताल का आज छठा दिन है। पिछले छः दिनों से संविदा कर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है। हड़ताल होने की वजह से इसका आंशिक असर अस्पताल में भी दिखने लगा है। मरीजों की परेशानी भी बढ़ने लगी है।
400 में से 136 कर्मियों की छंटनी
बता दें कि SNMMCH हॉस्पिटल में लगभग 400 कर्मी थे इसमें से 136 कर्मियों की छंटनी कर दी गई है। कर्मियों की माने तो पहले से कम कर्मी के भरोसे हॉस्पिटल चल रहा था। ऐसे में और छंटनी करके उसकी माली स्थिति प्रभावित हो गयी। बहरहाल स्वास्थ्य विभाग के इस फरमान से SNMMCH में लगातार आंदोलन जारी है। ऐसे में देखने वाली बात यह है कि इस आंदोलन का स्वास्थ्य विभाग और सरकार पर कितना असर पड़ता है।









