ईडी ने निलंबित आईएएस अधिकारी छवि रंजन सहित दस आरोपितों पर चार्जशीट दायर की है.भूमि घोटाले से संबंधित 74.39 करोड़ रुपये की दो भूखंडों को जब्त भी किया है। सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन की फर्जी तरीके से खरीद-बिक्री मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने अपनी विशेष अदातल में दस आरोपितों पर चार्जशीट दायर किय़ा है. ED को जांच में पता चला था कि झारखंड में भूमि माफिया का एक रैकेट सक्रिय है. इन भूखंडों में सेना के कब्जे वाली रांची के बरियातू मौजा की 4.55 एकड़ जमीन, जिसका बाजार मूल्य करीब 41.51 करोड़ रुपये है व बाजरा मौजा की 7.16 एकड़ जमीन, जिसका बाजार मूल्य 32.87 करोड़ रुपये है, शामिल हैं.ईडी ने झारखंड सरकार से साझा किए सबूत झारखंड सरकार के साथ बड़ागाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के खिलाफ मिले सबूतों को साझा किया।
14 अप्रैल को गिरफ्तार बड़गाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, सेना के कब्जे वाली जमीन का फर्जी रैयत प्रदीप बागची, जमीन दलाल बरियातू के मिल्लत कालोनी निवासी रिम्स का कर्मी अफसर अली उर्फ अफ्सू खान, डोरंडा के मनी टोला का निवासी इम्तियाज अहमद, बड़ागाईं निवासी मोहम्मद सद्दाम हुसैन, तल्हा खान, फैयाज अहमद, चार मई को गिरफ्तार रांची के पूर्व उपायुक्त आइएएस छवि रंजन व सात जून को गिरफ्तार सेना के कब्जे वाली जमीन के खरीदार जगतबंधु टी इस्टेट के निदेशक दिलीप घोष व अमित अग्रवाल शामिल हैं. इन पर आपसी मिलीभगत से मूल दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने व जालसाजी से रांची में जमीनों की खरीद-बिक्री के आरोपों की पुष्टि हुई है।
ईडी की जांच में यह पता चला कि झारखंड में भूमि माफिया का एक रैकेट सक्रिय है, जो कोलकाता व रांची में जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। इसके बाद जाली दस्तावेज के आधार पर ऐसे भूखंडों को अन्य व्यक्तियों को बेच देता है। ईडी ने इस मामले में 41 ठिकानों पर छापेमारी की, पांच सर्वे किया. ईडी ने इस छापेमारी में भूमि राजस्व विभाग की जाली मुहरें, जाली भूमि दस्तावेज, जालसाजों के बीच अपराध की कमाई के वितरण के रिकार्ड, जालसाजी करने संबंधित तस्वीरें, सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के सबूत को उजागर किया। इस मामले में सभी दसों आरोपित गिरफ्तार हुए, उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
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