झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा गरमाने लगा है। भाजपा इस मुद्दे को चुनावी मुद्दे के रूप में आगे ला रही है। बीजेपी विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने एक जनसभा में कहा है कि अगर झारखंड में भाजपा की सरकार आयी तो सभी घुसपैठियों को करेंगे बाहर,
हरिणचरा मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए बाबूलाल
झारखंड में बहुत सारे बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवेश कर रहे हैं। सबसे पहले झारखंड में प्रवेश करने वाले ऐसे लोगों को बाहर निकाला जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 9 साल की उपलब्धियां गिनाने वाले इस कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी संताल परगना के साहिबगंज में थे। यहां बोरियो प्रखंड के हरिणचरा मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए बाबूलाल ने झारखंड में बाग्लादेशी घुसपैठ को अहम मुद्दा बताया है। झारखंड से बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा सटी है। यह चिंता का कारण है कि यहां लगातार बांग्लादेश घुसपैठ बढ़ रहा है। अभी पिछले महीने ही झारखंड हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और केंद्रीय गृहमंत्रालय से बांग्लादेशी घुसपैठ के बाबत सवाल पूछा किया था।
झारखंड में बीजेपी की सरकार बनते ही पहला काम एनआरसी लाना
बाबूलाल मरांडी ने कहा इन इलाकों में रहने वाले सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं संताल और पहाड़िया जनजाति के लोगों को यह निशाना बना रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के नेता अपने वोट बैंक की खातिर घुसपैठ को संरक्षण दे रहे हैं। बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को सरकारी जमीन की बंदोबस्ती कर पट्टा दिलाया जा रहा है। राशन कार्ड और मतदाता सूची में उनका नाम जोड़ दिया गया है ताकि वोटबैंक का आधार बढ़ाया जा सके। झारखंड में बीजेपी की सरकार बनते ही पहला काम एनआरसी लाना होगा। घुसपैठियों को खदेड़ देंगे। घुसपैठ की वजह से साहिबगंज और पाकुड़ की डेमोग्राफी में बदलाव वाकई चिंता का विषय है।
हाईकोर्ट में दायर की गयी है जनहित .याचिका
इन इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठ की उस वक्त चर्चा तेज हुई थी जब दुमका की अंकिता और दिसंबर 2023 में बोरियो की रेबिका हत्याकांड मामले में आरोपी का नाम सामने आया था। पिछले महीने झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में दावा किया गया था कि झारखंड के साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा, दुमका और जामताड़ा जैसे जिलों में बांग्लादेशी नागरिकों को घुसपैठ हो रहा है। इस याचिका में यह भी बताया गया है कि कैसे इन घुसपैठियों का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा रहा है। बांग्लादेशी युवा स्थानीय आदिम जनजाति पहाड़िया और संताल समाज की लड़कियों से शादी कर उनकी जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
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