हजारीबाग जिले के बरही, इचाक और बड़कागांव अंचल क्षेत्र में वर्ष 2006 सें वन एवं सरकारी भूमि घोटाले के मामला चल रही है. इसके बाद 2010 में मामले को तत्कालीन निगरानी विभाग में दर्ज किया गया था.परन्तु चार साल तक फाइलें थाने की में दफन रही.बाद में इस विभाग का नामकरण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में रखा गया है। 13 साल तक एसीबी की फाइलों में यह मामला दबा रहने के बाद एक बार फिर से एसीबी ने इस मामले की फाइल खोल दी है। सैकड़ों एकड़ वन व सरकारी भूमि घोटाले मामले को अनुसंधानकर्ता एसीबी इंस्पेक्टर नुनुदेव राय को सौपी गई है. बता दे 17 साल बाद जाकर फिर से इस मामले की फाइल खोली गई है। और जांच शुरू कर दी है.एसीबी ने इस मामले से संबंधित अंचल अधिकारियों को पत्र भेजकर इस संबंध में डिटेल जानकारी की मांग है.एसीबी की जांच शुरू हो जाने से भूमि घोटाला में शामिल पदाधिकारी कर्मी और भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
अनुसंधानक ने मांगा तात्कालीन सीओ और कर्मियों का पूरा ब्योरा
एसीबी ने कहा जब घोटाले की गई,तब संबंधित अंचल में अंचलाधिकारी कौन थे,अंचल निरीक्षक,कर्मचारी व अमीन कौन पदस्थापित थे। इसके अलावा अन्य कौन से कर्मी की भूमिका इस घोटाले में रही थी,इसका पूरा ब्योरा मांगा है। वर्ष 2006 में थाना में मामला दर्ज किया गया था। उक्त सभी वाद में बंदोबस्त करने वाले तत्कालीन अंचलाधिकारी, अंचल निरीक्षक एवं कर्मचारी का नाम-पता वर्तमान पदस्थापन स्थल तथा मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस संबंध में बरही के सीओ अरविंद देवाशीष टोप्पो ने कहा कि हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है। जबकि एसीबी ने बरही अंचल के सीईओ को 15 जून को ही लेटर भेजा है।इसके अलावा अन्य कौन से कर्मी की भूमिका इस घोटाले में रही थी,इसका पूरा ब्योरा मांगा गया है।
भूमि घोटाले में किसी रही थी मुख्य भुमिका
अनुसंधान में कहा गया है कि यह कांड प्राथमिकी अभियुक्त वन विभाग के तत्कालीन अमीन निरीक्षक एवं अन्य प्राथमिकी अभियुक्तों के द्वारा भू-माफियाओं तथा स्थानीय व्यक्तियों की मिलीभगत से अपने पद का दुरुपयोग कर अपने निजी लाभ के लिए किया गया। और साथ ही जब भूमि का घोटाला की गई थी तब मामले संबंधित अंचलाधिकारी कौन थे,अंचल निरीक्षक,कर्मचारी व अमीन कौन पदस्थापित थे।
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