धनबाद : बीसीसीएल उत्तम किस्म की कोयले प्रोडक्शन करने के नाम से मशहूर है। इसीलिए बीसीसीएल को मिनी रत्न कंपनी भी कहा जाता है। लेकिन दुर्भाग्य है कि जिन श्रमिकों के बदौलत कोयला उत्खनन कर बीसीसीएल मिनी रत्न कंपनी का खिताब हासिल की है, आज उनका हाल बेहाल है। घरों में दरार पड़ी है, पानी के लिए तरस रहे हैं और नालियों में गंदगी का अंबार है।
झांकने तक नहीं जाते बीसीसीएल के अधिकारी
दुर्भाग्य यह है कि कोयला उत्खनन करने वाले श्रमिकों की बदहाली जिंदगी को देखने के लिए बीसीसीएल के अधिकारी और पदाधिकारी कभी नहीं जाते हैं। बीसीसीएल के एरिया 10 में आने वाली मुकुंदा परियोजना अंतर्गत एमओसीपी न्यू कॉलोनी में लगभग पांच हजार श्रमिक अपने परिवार को लेकर रह रहे हैं, लेकिन उनके आवास की स्थिति जर्जर हो गई है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। छत से प्लास्टर टूट कर नीचे गिर रहा है। बालकोनी में पड़ी दरार लोगों को खतरा महसूस करवा रहा हैं। कई श्रमिकों ने तो अपनी पूरी नौकरी तक इस कॉलोनी में बीता दिया है, लेकिन सुविधा के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है।
बजबजाती नालियां और गंदगी के साथ जीने को मजबूर श्रमिक
कॉलोनियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालियां बजबजा रही है। पानी के लिए नल तो है लेकिन उससे जल नहीं आता है। मूलभूत समस्याओं से परेशान यहां के श्रमिक अब आंदोलन के मूड में हैं। कई बार अधिकारियों को शिकायत भी की है, इसके बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हो रहा है। दिन प्रतिदिन गर्मी बढ़ती जा रही है। बढ़ते तापमान के साथ लोगों की प्यास भी बढ़ रही है। जरूरत है कि बीसीसीएल प्रबंधन कोई ठोस पहल करे और मुकम्मल व्यवस्था कराये।









