धनबाद : कोल सेक्टर में बीसीसीएल की एक अलग ही पहचान है। इसके वावजूद बीसीसीएल की लापरवाही के कारण लाखों की लागत से बना बीसीसीएल के एरिया 10 के अंतर्गत दिव्यांग हॉस्पिटल आज खंडार में तब्दील हो गया। हॉस्पिटल शुरू होते ही मजह एक सप्ताह में बंद हो गया और तब से यह अस्पताल अपने वीरांगी दंश झेलते हुए मरीज और डॉक्टर की राह देख रही है।
इस अस्पताल को जब आप देखेंगे तो पाएंगे वहां टूटी हुई बेड, खंडहर में तब्दील इमारत, स्थिर पड़ा झूला, झाड़ियों से भरा पूरा परिसर कोई भूत बंगला जैसा दिख रहा है। वर्षों पहले बनाया गया बीसीसीएल के द्वारा यह दिव्यांग अस्पताल महज एक सप्ताह चला, इसके बाद बंद हो गया।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और पूर्व कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने किया था उद्घाटन
बीसीसीएल के एरिया 10 के एमओसीपी अंतर्गत बनाया गया यह अस्पताल आज विभाग की लापरवाही के कारण खंडहर में तब्दील हो गया है। 2017 में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और पूर्व कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने इसका ऑनलाइन उद्घाटन किया था। उस वक्त यहां के आसपास के लोगों में हर्ष था कि दिव्यांग बच्चों को इलाज के लिए अब उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि हॉस्पिटल खुलते ही एक सप्ताह के अंदर बंद हो गया। और तब से यह अस्पताल सन्नाटे पड़े इस रास्ते से मरीज और डॉक्टर की राह देख रही है।
धूल फांक रही हाईटेक मशीन
शुरुआती समय में इस अस्पताल में कई तरह के हाईटेक मशीन भी लगाए गए थे जो आज धूल फांक रही है। अस्पताल परिसर में मरीजों की मनोरंजन के लिए झूला भी लगाया था जो आज स्थिर पड़ा है। अस्पताल के बाउंड्री टूट गई है और दीवारें की प्लास्टर साथ छोड़ दिया है। इर्द गिर्द झाड़ियां उग गई है। ऐसा लगता है कि ये कोई अस्पताल नहीं बल्कि भूत बंगला है।
लोगों ने बीसीसीएल से की हॉस्पिटल को पुनः चालू कराने की मांग
यहां के आस पास रह रहे लोगों ने इस हॉस्पिटल को पुनः चालू कराने की मांग बीसीसीएल से की है। लोगों की माने तो हर छोटी बड़ी घटना और बीमारी के लिए 30 किलोमीटर दूर एसएनएमएमसीएच जाना पड़ता है। कभी-कभी तो इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देता है।
बीसीसीएल से जिंदगी की भीख मांग रहा अस्पताल
बहरहाल दिव्यांगों को जिंदगी देने वाला अस्पताल आज खुद बीसीसीएल से जिंदगी की भीख मांग रहा है। बीसीसीएल की यह कोई एक अस्पताल की कहानी ऐसी नहीं है। बीसीसीएल के कई अस्पताल खंडहर में तब्दील हो गया है, जिसका सुध लेने वाला कोई नहीं है। जरूरत है बीसीसीएल के कल्याण विभाग को जागने की और मृत अस्पताल में जान डालने की, ताकि जिंदगी बचाने वाला अस्पताल को एक नया जीवनदान मिल सके।









