रांची और रायपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 27 अक्टूबर 2024 को की गई। इस छापेमारी में वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे, उत्पाद विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह और संबंधित अधिकारियों के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के ठिकानों पर छापेमारी शामिल थी। ED ने इस कार्रवाई में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्रियां जब्त कीं ।
छत्तीसगढ़ कनेक्शन और FIR
इस शराब घोटाले का छत्तीसगढ़ कनेक्शन भी सामने आया है। छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 7 सितंबर 2024 को इस मामले में उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी। रांची के विकास कुमार ने इस मामले में FIR दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था, जिसके बाद रायपुर में प्राथमिकी दर्ज हुई। आवेदन में कहा गया था कि शराब घोटाले की पूरी साजिश रायपुर में ही रची गई थी और आबकारी नीति में फेरबदल कराया गया था ।
नकली होलोग्राम और अवैध शराब
इस घोटाले में नकली होलोग्राम का इस्तेमाल कर राज्य में शराब की सप्लाई की गई थी। छत्तीसगढ़ में नकली होलोग्राम लगाकर पूरे राज्य में शराब की सप्लाई की गई थी, और इसी तरह झारखंड में भी नकली होलोग्राम लगाकर शराब की सप्लाई की गई। प्रिज्म होलोग्राम एंड फिल्म सिक्योरिटी लिमिटेड को शराब की बोतलों में होलोग्राम छापने का काम मिला था। मेसर्स सुमित फैसिलिटीज लिमिटेड को मैन पावर सप्लाई की जिम्मेदारी मिली थी। इन तीनों ही कंपनियों पर झारखंड में कार्रवाई हो चुकी है। आरोप है कि इस घोटाले से झारखंड सरकार को करोड़ों की क्षति पहुंचाई गई ।









