- जनगणना 2027 के प्रथम चरण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
- अब डिजिटल होगा देश का डेटा: जनगणना 2027 की तैयारी शुरू
गढ़वा। 08 अप्रैल 2026 को भारत की आगामी *जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना* को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के उद्देश्य से आज समाहरणालय सभागार में द्विचरणीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नामित प्रगणकों एवं फील्ड ट्रेनर्स को दक्ष एवं सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम चरण *08 अप्रैल 2026 से 10 अप्रैल 2026* तक तथा द्वितीय चरण *11 अप्रैल 2026 से 13 अप्रैल 2026* तक चलेगा। प्रतिदिन प्रशिक्षण का समय प्रातः 9:30 बजे से सायं 6:00 बजे तक निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा जनगणना की प्रक्रिया, डेटा संग्रहण की आधुनिक विधियों तथा तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई । इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कार्य में पारदर्शिता, शुद्धता एवं प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है।
मौके पर उपस्थित अपर समाहर्ता सह जिला जनगणना पदाधिकारी श्री राज महेश्वरम ने सभी पदाधिकारियों एवं फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से भाग लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, जिसके सफल क्रियान्वयन में प्रत्येक कर्मी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

*कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत श्रीबंशीधर नगर सह मास्टर ट्रेनर श्री राजकमल* ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से जनगणना 2027 से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना डिजिटल माध्यम से संपन्न की जा रही है, जो भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। डिजिटल जनगणना के अंतर्गत डेटा संग्रहण मोबाइल एप के माध्यम से किया जाएगा, जिससे जानकारी का संकलन अधिक तेज, सटीक एवं सुरक्षित होगा। इससे डेटा एंट्री में होने वाली त्रुटियों में कमी आएगी तथा वास्तविक समय (Real-Time) में निगरानी संभव हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण शीघ्रता से किया जा सकेगा, जिससे सरकार को योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में समयबद्ध और सटीक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। साथ ही, यह प्रक्रिया कागज रहित (Paperless) होने के कारण पर्यावरण के संरक्षण में भी सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंने जानकारी दी कि *स्व-गणना (Self Enumeration)* *का कार्य 01 मई 2026 से 15 मई 2026 तक* तथा *क्षेत्रीय गणना (Field Work) 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक प्रस्तावित है।*
डिजिटल जनगणना के संदर्भ में तकनीकी आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि एंड्रॉयड मोबाइल के लिए वर्जन 11 या उससे ऊपर तथा न्यूनतम 4GB रैम अनिवार्य है। वहीं iOS उपयोगकर्ताओं के लिए 15.0 या उससे उच्च संस्करण वाले उपकरण आवश्यक होंगे। साथ ही, फॉर्म भरते समय भाषा चयन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई, क्योंकि एक बार चयन के बाद उसमें परिवर्तन संभव नहीं होगा।

इस अवसर पर जनगणना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि जनगणना देश की विकास योजनाओं की आधारशिला होती है। इसके माध्यम से जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त होते हैं। ये आंकड़े सरकार को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के उचित वितरण तथा नीतिगत निर्णय लेने में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। जनगणना से प्राप्त जानकारी देश के समग्र विकास, सामाजिक संतुलन एवं प्रशासनिक सुधार के लिए अत्यंत आवश्यक होती है।
आज के प्रशिक्षण सत्र में गढ़वा, मेराल, कांडी, रंका, रमकंडा, चिनियाँ, रमना, खरौंधी एवं धुरकी प्रखंडों के फील्ड ट्रेनर्स ने भाग लिया।
कार्यक्रम में जनगणना कार्य निदेशालय, झारखंड, रांची से आए सहायक निदेशक (आईटी) श्री सुब्रत सेन, कार्यपालक पदाधिकारी सह मास्टर ट्रेनर श्री राजकमल, खरौंधी अंचल अधिकारी सह मास्टर ट्रेनर श्री गौतम कुमार लकड़ा सहित अन्य अधिकारी एवं चार्ज फील्ड ट्रेनर्स उपस्थित रहे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनगणना 2027 को सफल, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुदृढ़ एवं भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।










