वर्तमान संसदीय कार्य मंत्री ने विधानसभा में झारखंड के विकास पर केंद्र द्वारा आवंटित राशि में कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने प्रशासी विभागों के माध्यम से केंद्र से लगातार राशि की मांग कर रही है। न्यायपालिका की शरण लेकर भी राज्य हित में प्रयास किए गए हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि अन्य राज्यों और झारखंड को मिले केंद्रीय करों का विस्तृत अध्ययन कर रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिससे यह समझा जा सके कि विकास किस स्तर तक प्रभावित हुआ है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने केंद्रीय योजनाओं के झारखंड में क्रियान्वयन में हो रही कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से झारखंड के हिस्से में केंद्र द्वारा कहां-कहां कटौती की गई है, इसका अध्ययन कर तथ्यों को पेश किया जाए। प्रदीप यादव ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में मिली राशि का आंकड़ा पेश करते हुए बताया कि 2022-23 में 6767 करोड़, 2023-24 में 6741 करोड़ और 2024-25 में केवल 4434 करोड़ की राशि आवंटित की गई।
विधायक ने अल्प सूचित प्रश्न में केंद्र संपोषित योजनाओं में केंद्र द्वारा तय राशि से कम राशि देने का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2025-26 के बजट में राज्य द्वारा कर्णांकित राशि के अनुरूप केंद्र सरकार से आवंटन राशि का सवाल उठाया। यह मुद्दा झारखंड के विकास और राज्य के हिस्से की राशि को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। राज्य सरकार ने इस विषय पर गहन अध्ययन और तथ्यों को सामने लाने का आश्वासन दिया है।