आज अपराह्न 2 बजे dr श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में शैक्षणिक लेखन विषय पर एक कार्यशाला सह व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति dr तपन कुमार शांडिल्य ने विस्तार से इस विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शैक्षणिक लेखन एक ऐसी लेखन शैली है जिसका उपयोग विभिन्न अकादमिक कार्यों के लिए किया जाता है। उन्होंने इसके लक्षित समूह को इंगित करते हुए बताया कि प्रारंभिक स्तर पर विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और अनुसंधानकर्ता इसके प्रमुख उपयोगकर्ता है।

उन्होंने काफी विस्तार से इसके महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्तमान संदर्भ में विद्वानों को अपने विचार प्रस्तुत करने में , शोध का विश्लेषण करने में और एक प्रभावी तर्क तैयार करने में मदद करता है। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियो से निरंतर संवाद के क्रम में कई प्रश्न पूछे । उन्होंने उनसे शोध के अंतर्गत ऑब्जेक्टिव और परिकल्पना के मध्य अंतर को जानना चाहा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने संवाद के क्रम में रुपए पर हस्ताक्षर के विषय पर भी प्रश्न पूछा। इसके अलावा उन्होंने उपस्थित शिक्षकों को साहित्यिक नकल और विद्यार्थियो और शोधकर्ताओं को उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने शैक्षणिक लेखन के चार प्रमुख विशेषताओं यथा वर्णात्मक, विश्लेषणात्मक, प्रेरक और आलोचनात्मक की विस्तार से जानकारी दी। ग्रामीण विकास विभाग की समन्वयक डॉ. रीना नंद के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में डीएसडब्ल्यू डॉ. एस.एम. अब्बास, रिसोर्स पर्सन के तौर पर डॉ. एकता बख्शी, मिस निरल बाखला और ग्रामीण विकास विभाग के शिक्षक विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह जानकारी पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी।









