रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से हटाए जाने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने इस निर्णय को नैसर्गिक न्याय और रिम्स नियमावली-2002 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी है। याचिका में उन्होंने दावा किया कि उनकी नियुक्ति तीन साल के कार्यकाल के लिए हुई थी, लेकिन बिना पक्ष सुने और झूठे आरोपों के आधार पर उन्हें पद से हटा दिया गया। उनका कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरी ईमानदारी से काम किया और किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती, फिर भी उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए। इस फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने अदालत से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
याचिका में डॉ. राजकुमार ने झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और रिम्स शासी परिषद के अध्यक्ष डॉ. इरफान अंसारी के आदेश को भी रद्द करने की अपील की है। इस आदेश में कहा गया था कि निदेशक रहते हुए उन्होंने मंत्रिपरिषद और शासी परिषद के निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया, जिससे उनकी सेवा संतोषजनक नहीं रही। इसी आधार पर उन्हें तीन महीने का वेतनभत्ता देकर पद से हटाने का निर्णय लिया गया। डॉ. राजकुमार का कहना है कि यह फैसला नियमों के अनुरूप नहीं है और प्रशासनिक रूप से उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
अब इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट क्या फैसला देगा, यह देखने वाली बात होगी। अगर अदालत उनके पक्ष में निर्णय देती है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती का एक उदाहरण होगा। दूसरी ओर, अगर अदालत सरकार के फैसले को बरकरार रखती है, तो यह दर्शाएगा कि नियमों के उल्लंघन के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।










