3 जनवरी 2026 को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए और राष्ट्रपति निकोलस मदुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया। यह अभियान महीनों की तैयारी का नतीजा था, जिसमें डेल्टा फोर्स कमांडोज ने काराकास में मदुरो के किले जैसे कंपाउंड पर छापा मारा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ, जबकि वेनेजुएला की वायु रक्षा प्रणालियों को नष्ट कर दिया गया। मदुरो को यूएसएस इवो जिमा जहाज पर ले जाया गया और बाद में न्यूयॉर्क पहुंचाया गया, जहां वे 2020 के नारको-टेररिज्म आरोपों का सामना करेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला पर अस्थायी नियंत्रण रखेगा ताकि देश के विशाल तेल भंडारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सुरक्षित संक्रमणकाल सुनिश्चित हो। ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए अमेरिकी कंपनियों से अरबों डॉलर निवेश की बात कही, जो दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों वाला देश है। काराकास और ब्यूनस आयर्स में विपक्षी समर्थकों ने जश्न मनाया, जबकि वेनेजुएला सरकार ने इसे आक्रमण बताकर निंदा की।

इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। रूस ने इसे सशस्त्र आक्रमण करार दिया, जबकि सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। कई विश्लेषकों ने इसे लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप की पुरानी यादों से जोड़ा, वहीं ट्रंप प्रशासन ने इसे नारको-टेररिज्म के खिलाफ कानून प्रवर्तन कार्रवाई बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है, जो वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकती है।










