आज दिनांक 7 मार्च 2024 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची की महिला सेल के द्वारा भारतीय महिला अध्ययन संघ (आईएडब्लूएस) रांची सेंटर, झारखंड के संयुक्त तत्वाधान में विश्व महिला दिवस की पूर्व संध्या पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विश्व महिला दिवस की पृष्ठभूमि में विश्वविद्यालय में 5 मार्च को लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिसका थीम संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2024 के लिए निर्धारित थीम ‘इन्वेस्ट इन वुमन :एक्सेलरेट प्रोग्रेस’ पर केंद्रित था। इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से कुल 73 छात्र- छात्राओं ने भाग लिया।
आज इस प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरुस्कृत भी किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ आमंत्रित अतिथियों को स्वागत चिन्ह के रूप में पौधा देकर किया गया। आज के कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि और वक्ता के तौर पर निशा कुमारी , डीपीआरओ, रामगढ़ तथा रश्मि लाल ,अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, रांची, झारखंडको आमंत्रित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति dr तपन कुमार शांडिल्य ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण एक आंदोलन है जो पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक विभाजन को खत्म करने का प्रयास करता है। उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण भौतिक या आध्यात्मिक, शारीरिक या मानसिक सभी स्तर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना कर उन्हें सशक्त बनाने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि आज कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं इस दिशा में सतत प्रयत्नशील है। विशिष्ट अतिथि और वक्ता रश्मि लाल ने अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए यह बताया कि किस तरह से आज भी महिलाओं को नौकरी करने से हतोत्साहित किया जाता है। अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ कानून का होना ही पर्याप्त नहीं होता है। जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक महिलाओं को सुरक्षा देने की नियत से बने कानून सार्थक नहीं हो सकेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि और वक्ता निशा कुमारी ने अपने वक्तव्य में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्राओं को हर परिस्थिति से जूझना होगा तभी वे समाज के तमाम बंधनों को तोड़ कर अपना वास्तविक लक्ष्य हासिल कर पायेंगी। उन्होंने महिलाओं को सशक्त होकर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने पर बल दिया।
अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए झारखंड महिला अध्ययन प्रोजेक्ट की प्रभारी डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने कुछ तथ्यों की व्याख्या करते हुए समाज की वास्तविक स्थिति की चर्चा की। उन्होंने कहा की वो समाज कभी तरक्की नहीं कर सकता जिस प्रगति में समाज की आधी आबादी यानी महिलाओं की सहभागिता न हो। इसके उपरांत पुरस्कार तथा प्रमाणपत्र का वितरण किया गया। विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की छात्र वीणा कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया जिसे 1500 रुपये का पुरस्कार राशि दिया गया।
कार्यक्रम के अंत मे dr अनीता मेहता ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नमिता सिंह , डीएसडब्ल्यू डॉ. एसएम. अब्बास सहित महिला सेल की dr शमा सोनाली, dr शुचि संतोष बरवार, dr रीना नंद आदि की उपस्थिति रही। यह जानकारी पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी।










