झारखंड में बेरोजगारी की स्थिति ने समाज के विभिन्न आयामों को झकझोर दिया है। स्नातक, परास्नातक और पीएचडी जैसे उच्च शिक्षित युवा, जिनकी योग्यता उन्हें देश के प्रमुख क्षेत्रों में योगदान देने योग्य बनाती है, अब छोटी-छोटी नौकरियों की तलाश में संघर्षरत हैं। हाल ही में रांची में आयोजित चौकीदार भर्ती परीक्षा ने इस गंभीर स्थिति को और उजागर किया। यह परीक्षा केवल दसवीं पास उम्मीदवारों के लिए थी, फिर भी बड़ी संख्या में ग्रेजुएट्स और पीजी डिग्रीधारी इसमें शामिल हुए।
ऐसे ही 50 अभ्यर्थियों से बातचीत के दौरान पता चला कि इनमें से अधिकांश स्नातक या उससे अधिक योग्यता रखने वाले थे। उनमें से कुछ ने नेट या पीएचडी तक की पढ़ाई कर रखी थी। उनका कहना था कि लंबे समय से नौकरी पाने के लिए परीक्षाएं देते रहे हैं, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। ऐसे में, उम्र के बढ़ने के साथ किसी भी तरह की नौकरी स्वीकार करना उनके लिए प्राथमिकता बन गई है। इस प्रकार की स्थिति यह दर्शाती है कि झारखंड में रोजगार का अभाव न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहा है।
इसके बावजूद भी, राज्य में औद्योगिक विकास और बड़े प्रोजेक्ट्स की कमी ने समस्या को और गहराया है। इस बार 295 चौकीदार पदों के लिए कुल 6672 एडमिट कार्ड जारी किए गए थे, लेकिन केवल 4978 उम्मीदवार ही परीक्षा में शामिल हुए। एक पद के लिए औसतन 17 दावेदार थे, जिनमें से 70 प्रतिशत उच्च शिक्षित थे। ऐसे हालात न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय हैं। यह स्पष्ट करता है कि बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए राज्य और देश स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।










