🔸 “सुरक्षित एवं सशक्त महिला सशक्त झारखंड” के तहत अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का किया गया आयोजन
🔸 सामाजिक कुरीति निवारण एवं बाल विवाह मुक्त झारखण्ड विषय पर दी गई जानकारी
🔸 बाल विवाह एवं डायन
कु-प्रथा जैसी कुरीतियों के निवारण का एकमात्र उपाय शिक्षा है – उपायुक्त
🔸 मिशन शक्ति के तहत सुरक्षित-सशक्त-सम्मानित महिला अधिकारों को लेकर किया गया जागरूक
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आज दिनांक 20 जनवरी 2026 को सामाजिक कुरीति निवारण योजना, राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, बाल विवाह मुक्त झारखण्ड एवं मिशन शक्ति योजना से संबंधित जिला स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन टाउन हॉल, गढ़वा में किया गया। प्रशिक्षण सह कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी दिनेश यादव, जिला परिषद उपाध्यक्ष सत्यनारायण यादव, अपर समाहरता राज महेश्वरम, अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश, गढ़वा बीडीओ कुमार नरेन्द्र नारायण, सीओ शफी आलम, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग पंकज कुमार गिरि आदि द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अतिथियों का स्वागत महिला पर्यवेक्षिकाओं द्वारा पुष्पगुच्छ व शॉल भेंट कर किया गया।

उक्त प्रशिक्षण सह कार्यशाला कार्यक्रम में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह उन्मूलन सरकार द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह के लिए बालिकाओं की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं बालकों की 21 वर्ष निर्धारित है, इससे कम उम्र में विवाह कराना कानूनन अपराध है। इनके द्वारा बताया गया कि वर्ष 2024 में 12 एवं 2025 में कुल 17 बाल विवाह को रोका गया है। किसी भी संदिग्ध स्थिति में टोल फ्री चाईल्ड हेल्पलाइन 1098 , महिला हेल्पलाइन 181, पुलिस हेल्पलाइन 112 पर देने की अपील की गई। मिशन शक्ति के अंतर्गत बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, शक्ति सदन, पालना आदि योजनाओं का संचालित किया जा रहा है।
मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त दिनेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा जैसी कुरीति को दूर करने का एकमात्र उपाय शिक्षा है। डायन जैसी ज्यादातर केस असहाय, दलित, पिछड़ा, विधवा परिवार में ही पाया जाता है। इस तरह के अंधविश्वास से दूर रहने एवं सामाजिक चेतना को जगाने का आग्रह किया गया। उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने एवं लोगों को जागरूक करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक पदाधिकारी, मुखिया, स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी सेविकाएं एवं समाज के सभी प्रतिनिधि एकजुट होकर जमीनी स्तर पर कार्य करें, तो बाल विवाह, डायन कुप्रथा, महिला उत्पीड़न एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने अपील किया कि बाल विवाह या डायन कुप्रथा जैसी किसी भी कुरीति की सूचना मिलने पर तुरंत अपने स्तर से या उच्च अधिकारी अथवा निकटतम थाना को अविलंब सूचित करें। उन्होंने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, गर्भवती महिलाओं को प्रथम एवं द्वितीय प्रसव बालिका होने पर प्रोत्साहन राशि, मुख्यमंत्री मंत्री कन्यादान योजना, सामूहिक विवाह योजना, राज्य विधवा पुन:विवाह योजना आदि प्रमुख हैं।

अपर समहार्ता राज महेश्वरम ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों और अपराधों की रोकथाम के लिए केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि जानकारी और जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है। उन्होंने संबंधित सभी मंचों पर बैठकों के माध्यम से नियमित चर्चा, कानूनों व दंड प्रावधानों की जानकारी के प्रसार, तथा आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्वयं सहायता समूहों, विद्यालय प्रबंधन समितियों एवं माता समितियों की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मीडिया एवं सार्वजनिक स्थलों-पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र आदि-पर प्रचार-प्रसार के माध्यम से समय रहते निवारक कदम उठाने की आवश्यकता बताई।
जिला परिषद, उपाध्यक्ष श्री सत्यनारायण यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के सभी वर्ग अपनी जिम्मेदारी निभाएँगे। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासन या किसी एक विभाग का कार्य नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधि, शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविकाएँ और समाज कल्याण से जुड़े सभी लोगों की संयुक्त भूमिका आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों और पंचायत स्तर की बैठकों में अभिभावकों को शामिल कर बाल विवाह, शिक्षा और सरकारी योजनाओं पर नियमित चर्चा की जाए, ताकि जागरूकता बढ़े और समय रहते सामाजिक बुराइयों पर रोक लगाई जा सके।
सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा पंकज कुमार गिरि ने कहा कि बाल विवाह के मुख्य कारण सामाजिक परंपराएं और रूढ़ियां हैं, जिन्हें कुछ समाजों में परंपरा के रूप में स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह से बच्चों के अधिकारों का हनन होता है, उनका मानसिक एवं शारीरिक विकास बाधित होता है। उन्होंने बताया कि 15-19 वर्ष की किशोरियों में मातृ मृत्यु, एनीमिया, कुपोषण एवं शिक्षा के बीच में छूट जाने का खतरा अधिक होता है। समय से पहले जिम्मेदारियां, हिंसा, यौन शोषण एवं विभिन्न रोगों की आशंका भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इन सभी कुरीतियों के उन्मूलन हेतु समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। आपके सहयोग के बिना न तो समाज पूर्ण हो सकता है और न ही प्रशासन अपने दायित्वों का सफल निर्वहन कर सकता है।
कार्यशाला में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामूहिक अंतिम संस्कार योजना, डायन कुप्रथा उन्मूलन योजना, सामूहिक विवाह कार्यक्रम, निःशक्त कल्याणार्थ योजना सहित राज्य सरकार की विभिन्नजनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही मिशन शक्ति के अंतर्गत महिला सुरक्षा एवं महिला सशक्तिकरण घटक तथा डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 की भी जानकारी दी गई। उक्त कार्यशाला के दौरान बताया गया कि मिशन शक्ति के अंतर्गत सखी वन स्टॉप सेंटर का संचालन सभी जिलों में किया जा रहा है, इसके अंतर्गत हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सेवाओं चिकित्सीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुलिस सहायता, विधिक परामर्श एवं अल्पावधि आश्रय की जानकारी दी। इसके साथ ही महिला हेल्पलाइन 181 के द्वारा 24 घंटे आपातकालीन सेवा प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सावित्रीबाई किशोरी समृद्धि योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामूहिक विवाह कार्यक्रम, सामूहिक अंतिम संस्कार योजना एवं दिव्यांग कल्याणार्थ योजनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यशाला के दौरान घरेलू महिला हिंसा, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, डायन प्रथा, बाल विवाह, सामाजिक कुरीतियाँ एवं नशा मुक्ति जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की गई। साथ ही मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सामाजिक कुरीति निवारण योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना एवं मिशन शक्ति के उद्देश्यों और लाभों से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।
प्रखंड विकास पदाधिकारी गढ़वा कुमार नरेंद्र नारायण गढ़वा ने बताया कि डायन का आरोप विधवा, असहाय महिलाओं पर किसी विवाद की वजह से लगाया जाता है। डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। इसके अलावा नशा को रोकने के लिए अधिनियम, कन्या भ्रूण हत्या पर भी चर्चा किया गया। रिसोर्स पर्सन, यूनिसेफ के द्वारा बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, डायन प्रथा, बाल विवाह निषेध आदि के बारे में विस्तृत जानकारी पीपीटी के माध्यम से दिया गया। उक्त कार्यशाला में उपस्थित सबों के बीच बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा के खिलाफ शपथ ग्रहण भी कराया गया।
उक्त प्रशिक्षण सह कार्यशाला कार्यक्रम में उपरोक्त पदाधिकारी के अतिरिक्त बड़ी संख्या में मुखिया, आंगनबाड़ी सेविकाएं, स्वयंसेवी संगठन, विभिन्न जनप्रतिनिधि आदि उपस्थित रहें।










