- जनजातीय गरिमा उत्सव एवं जन भागीदारी अभियान के तहत समाहरणालय सभागार में भव्य कार्यक्रम आयोजित
- जनजातीय गरिमा उत्सव का विशेष रूप से दिनांक 18 मई से 25 मई 2026 तक आयोजन कर किया जायेगा जनजातीय उत्थान का कार्य
गढ़वा। दिनांक 18 मई 2026 को *“जनजातीय गरिमा उत्सव, जन भागीदारी अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले”* के तहत समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री अनन्य मित्तल की अध्यक्षता में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा, जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश, गढ़वा जिले के विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि, झारखंड प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं उनके सर्वांगीण विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री मित्तल ने कहा कि जनजातीय समाज हमारे सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा है। सरकार द्वारा संचालित “सबसे दूर–सबसे पहले” अभियान का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जनजातीय समुदायों के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है तथा जनभागीदारी से ही विकास की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीवीटीजी (जनजातीय समुदायों) के उत्थान के लिए कई जन कल्याणकारी योजनाएं यथा पीएम जनमन एवं धरती आबा जनजातीय कल्याण उत्थान जैसे कार्य किया जा रहे हैं जिसके तहत जनजातीय समुदायों से जुड़े मामलों एवं उनके हक अधिकार के कार्य किया जा रहे हैं। इसी कड़ी में उनकी समस्याओं के त्वरित निष्पादन एवं योजनाओं से आच्छादन हेतु दिनांक 18 मई 2026 से 25 मई 2026 तक विशेष रूप से कैंप का आयोजन करते हुए उनकी समस्याओं को दूर करने हेतु “जनजातीय गरिमा उत्सव, जन भागीदारी अभियान, सबसे दूर-सबसे पहले” का आयोजन किया जा रहा है। उपायुक्त ने मौके पर उपस्थित जिला कल्याण पदाधिकारी एवं प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों समेत संबंधित अन्य संबंधित अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ आयोजित इन निर्धारित तिथियों में जनजातीय समुदाय के समस्याओं को हल करने का निर्देश दिया।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय गरिमा उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान, पहचान और अधिकारों को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और समाज के बीच समन्वय स्थापित कर विकास योजनाओं को धरातल तक पहुंचाना प्राथमिकता है, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक सरकारी सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित हो सके।
वहीं जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से जनजातीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने समुदाय के लोगों से योजनाओं में सक्रिय भागीदारी निभाने और अपने अधिकारों एवं अवसरों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनजातीय समुदाय के हीरामन कोरवा, रतन सिंह सहित अन्य लोगों ने भी अपनी भागीदारी निभाई और विभिन्न योजनाओं एवं विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ तथा जनजातीय समाज के उत्थान और सम्मान के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया गया।










