राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर किए गए ‘दिमागी नक्सली’ (वैचारिक समर्थकों) वाले कटाक्ष पर कांग्रेस पार्टी ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के जनरल इन-चार्ज कम्युनिकेशंस जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अपनी हताशा में इस हद तक गिर चुके हैं कि उन्होंने दीपावली जैसे पवित्र पर्व के दिन भी देश को अपने “ट्रेडमार्क” आरोपों और कटाक्षों से नहीं बख्शा। कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री की मानसिक स्थिति और राजनीतिक बौखलाहट का स्पष्ट प्रमाण बताया है।
कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों पूरी तरह से डिस्टर्ब, परेशान और desesperate (बेचैन) नजर आ रहे हैं, और उनका ‘झोला उठाने का समय’ (सत्ता से विदाई का वक्त) अब तेजी से नजदीक आ रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता के वास्तविक मुद्दों और विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बयानबाजी का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन देश की जनता अब सब भली-भांति समझ चुकी है और आगामी समय में इसका लोकतांत्रिक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह जुबानी जंग ऐसे समय में तेज हुई है जब दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक और सियासी खींचतान चरम पर है। कांग्रेस का यह तीखा तेवर यह साफ दर्शाता है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने वाला है, जहाँ हर एक बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलेंगी। विपक्षी दलों का यह हमला सत्ता पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।










