- *सीमांत से समृद्धि की ओर: चिरका डैम में ‘नीली क्रांति’ ने बदली आदिवासी जीवन-रेखा*
- *नीति आयोग की टीम ने किया चिरका डैम का दौरा, केज एक्वाकल्चर मॉडल की सराहना*
- *खेती, मत्स्य एवं स्वास्थ्य-तीनों क्षेत्रों में समन्वित विकास की दिखी प्रभावी झलक*
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गढ़वा। जितेन्द्र श्रीवास्तव (भा.प्र.से.), CMD, REC Limited, नई दिल्ली-सह-गढ़वा जिला प्रभारी, नीति आयोग, भारत सरकार ने आज गढ़वा जिले के खजुरी-लगमा क्षेत्र में कृषि गतिविधियों का अवलोकन किया, इसके पश्चात चिनियाँ प्रखंड अंतर्गत स्थित चिरका डैम का दौरा तथा CHC चिनियाँ का औचक निरीक्षण किया।
इस अवसर पर उनके साथ उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री दिनेश यादव, उप विकास आयुक्त श्री पशुपतिनाथ मिश्रा, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री धीरज प्रकाश, सिविल सर्जन डॉक्टर जॉन. एफ. कैनेडी, जिला मत्स्य पदाधिकारी श्री धनराज आर. कापसे, जिला कृषि पदाधिकारी श्रीमती खुशबू पासवान सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
- कृषि गतिविधियों का अवलोकन, फसल की स्थिति संतोषजनक
दौरे के क्रम में नीति आयोग की टीम द्वारा गढ़वा जिले में संचालित कृषि गतिविधियों का गहन अवलोकन किया गया। निरीक्षण के दौरान फसलों की स्थिति अत्यंत अच्छी पाई गई तथा सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता के कारण मिट्टी में नमी की स्थिति संतोषजनक पाई गई। किसानों द्वारा कृषि एवं पशुपालन को एकीकृत करते हुए आजीविका संचालित की जा रही है तथा घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बायोगैस ऊर्जा का भी उपयोग किया जा रहा है।

निरीक्षण में यह भी पाया गया कि किसान उन्नत कृषि पद्धतियों जैसे लाइन बुवाई, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं समुचित कीट प्रबंधन को अपना रहे हैं।
हालांकि किसानों ने सिंचाई की सतत उपलब्धता, कीट प्रकोप, उर्वरक आपूर्ति, जंगली जानवरों से फसल क्षति एवं जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से भी अधिकारियों को अवगत कराया।
किसानों से संवाद के दौरान यह जानकारी दी गई कि सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं (PDMC, PM-KUSUM), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाओं से उन्हें प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो रहा है। एक किसान द्वारा बताया गया कि लगभग 8 एकड़ भूमि से 6 से 6.5 लाख रुपये की वार्षिक शुद्ध आय अर्जित हो रही है।
- अधिकारियों को दिए गए आवश्यक निर्देश
दौरे के उपरांत किसानों को बेहतर उत्पादन हेतु अनुशंसित कृषि पैकेज अपनाने की सलाह दी गई।
वहीं जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि किसानों को समय पर विस्तार सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ तथा कृषि विभाग एवं किसानों के बीच समन्वय एवं निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए।
साथ ही सरकारी सिंचाई योजनाओं एवं फसल बीमा योजनाओं के अंतर्गत अधिकाधिक किसानों को आच्छादित करने, समय पर कृषि इनपुट की आपूर्ति, बेहतर सिंचाई सुविधा, तकनीकी मार्गदर्शन एवं बाजार से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।

- चिरका डैम में ‘नीली क्रांति’ का सशक्त उदाहरण
दौरे के दौरान जिला मत्स्य पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि चिरका डैम, जो कभी एक सुदूरवर्ती आकांक्षी एवं धरती आबा ग्राम के रूप में जाना जाता था, आज आधुनिक ‘केज एक्वाकल्चर’ (पिंजरा मत्स्य पालन) के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बन चुका है। इस परियोजना के माध्यम से मत्स्यजीवी सहकारी समिति के 165 आदिवासी सदस्यों ने पारंपरिक संघर्षों से बाहर निकलकर उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाया है।
परियोजना की सफलता इसके ठोस आँकड़ों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। अब तक 12 टन मछली का विक्रय किया जा चुका है, जबकि 40 से 50 टन मछली कटाई (हार्वेस्टिंग) के लिए तैयार है। वर्तमान में 36 पिंजरे सक्रिय हैं तथा PMMSY-2 योजना के तहत स्थापित 12 नए पिंजरे आगामी सीजन के लिए पूर्णतः तैयार हैं।
यह पहल केवल आर्थिक सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक प्रभाव भी व्यापक हैं। स्थानीय स्तर पर स्थायी स्वरोजगार उपलब्ध होने से आदिवासी युवाओं के पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। मछली जैसे उच्च प्रोटीन युक्त आहार की उपलब्धता से महिलाओं एवं बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ है तथा सहकारी समितियों के माध्यम से समुदाय को संगठित कर उनकी ऊर्जा को रचनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों की ओर मोड़ा गया है।
इस अवसर पर नीति आयोग के जिला प्रभारी श्री जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि, *“चिरका डैम में संचालित केज एक्वाकल्चर मॉडल यह सिद्ध करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और समुदाय की सहभागिता से सुदूर एवं आदिवासी क्षेत्रों को भी आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जा सकता है। यह मॉडल अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत है।”*
वहीं उपायुक्त श्री दिनेश यादव ने कहा कि,*“जिला प्रशासन का प्रयास है कि कृषि, मत्स्य एवं स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में समन्वित विकास को बढ़ावा देते हुए योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। चिरका डैम एवं कृषि गतिविधियों में दिख रहा परिवर्तन इसी सोच का परिणाम है।”*
- CHC चिनियाँ का औचक निरीक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन
चिरका डैम निरीक्षण के पश्चात नीति आयोग की केंद्रीय टीम द्वारा रंका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत चिनियाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान गढ़वा जिला के सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कैनेडी एवं चिनियाँ की चिकित्सा प्रभारी डॉ. पल्लवी कुमारी द्वारा स्वास्थ्य केंद्र का प्रतिनिधित्व किया गया।
डॉ. पल्लवी कुमारी ने स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध सेवाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण अस्पताल का संचालन चलंत चिकित्सकों एवं आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत पाँच आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं तथा ए.एन.एम., सी.एच.ओ. एवं सहिया दीदी द्वारा गाँव स्तर तक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही मानव संसाधन एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की आवश्यकता से भी टीम को अवगत कराया गया।
निरीक्षण के दौरान उच्च पदाधिकारियों ने सीमित संसाधनों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने हेतु चिकित्सा प्रभारी डॉ. पल्लवी कुमारी के प्रयासों की सराहना की तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इस अवसर पर चिकित्सा पदाधिकारी के साथ-साथ DPM, BPM, स्वास्थ्य कर्मी, सहिया सहित अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित थे।









