- पीएम-पोषण योजना के तहत विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की होगी नियमित जांच
- उपायुक्त के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों ने शुरू किया औचक निरीक्षण अभियान, चिनियां प्रखंड के चार विद्यालयों की हुई जांच
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गढ़वा। पीएम-पोषण योजना से आच्छादित विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता एवं खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने जिले के सभी खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत संचालित सभी सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं एकलव्य विद्यालयों का नियमित एवं औचक निरीक्षण कर बच्चों को दिए जा रहे भोजन तथा उसमें प्रयुक्त खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच करने और जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

यह कार्रवाई दैनिक समाचार पत्र *दैनिक भास्कर में प्रकाशित *”बच्चों की सेहत से खिलवाड़, लेभरी मध्य विद्यालय में मिलावटी तेल से बन रहा था मध्याह्न भोजन”* शीर्षक वाली खबर के बाद जिला प्रशासन द्वारा गंभीरता से संज्ञान लेते हुए की जा रही है।*
उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में बच्चों के भोजन में अपमिश्रित अथवा मिलावटी खाद्य तेल एवं अन्य खाद्य पदार्थों का उपयोग बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा है। इस प्रकार की लापरवाही न केवल अनुचित है, बल्कि कानून के प्रावधानों के तहत दंडनीय भी हो सकती है। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिले में जहां-जहां बच्चों के लिए भोजन संचालित किया जा रहा है, वहां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए तथा पीएम-पोषण योजना एवं केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन कराया जाए।
इसी क्रम में आज *खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, रंका रोहित कुमार* द्वारा रंका अनुमंडल अंतर्गत चिनियां प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान *नव प्राथमिक विद्यालय चीखौरापत्थर, उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय, उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय रानीचेरी एवं राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय चिरका* का निरीक्षण कर वहां बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे मध्याह्न भोजन एवं भोजन में प्रयुक्त खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच की गई।

निरीक्षण के क्रम में नव प्राथमिक विद्यालय चीखौरापत्थर में सरसों तेल के स्थान पर वनस्पति तेल के उपयोग का मामला सामने आया। इसके अलावा निरीक्षण किए गए सभी विद्यालयों में बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुरूप मध्याह्न भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था। इस पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए विद्यालय प्रबंधन को निर्धारित मानकों एवं मेन्यू के अनुसार ही बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
उन्होंने विद्यालय प्रबंधन एवं संबंधित कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों के भोजन में सरसों तेल सहित सभी खाद्य सामग्रियों की शुद्धता एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा किसी भी परिस्थिति में मिलावटी अथवा अपमिश्रित खाद्य पदार्थों का उपयोग न किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में खाद्य गुणवत्ता से संबंधित किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन द्वारा इस अभियान का उद्देश्य विद्यालयों एवं अन्य संस्थानों में बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना तथा पीएम-पोषण योजना के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि *बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा* तथा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर नियमित निगरानी एवं जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।










