गोड्डा के पथरगामा प्रखंड अंतर्गत बारकोप में 1000 वर्ष पुराना महल है. जो की अब खंडर में तब्दील हो गया है. बताया जाता है कि यह खंडहर कभी आलीशान महल हुआ करता था. और इस महल में रहते थे राजा महाराज देव ब्रह्म. इनकी शान-ओ-सौकत ऐसी थी, जिसे देख सब हैरान रहते थे. महाराज देव ब्रह्म बारकोप स्टेट के राजा थे. वर्तमान का गोड्डा, दुमका और बिहार का भागलपुर, मुंगेर व बांका बारकोप स्टेट का ही हिस्सा हुआ करता था. बताते हैं कि सन 1200 के करीब यह महल काफी आलीशान हुआ करता था. इतिहासकार बताते हैं कि सन् 1689 के करीब बारकोप स्टेट का बंटवारा किया गया, जिसका कुछ क्षेत्र महागामा के परसंडा स्टेट में चला गया और बाकी बचा क्षेत्र बरकोप स्टेट के नाम रह गया.
बताया जाता है कि बंटवारे के बाद परसंडा स्टेट के राजा मॉल ब्रह्म को बनाया गया था. यह इलाका अब महागामा के नाम से जाना जाता है. राजा के वंशज खुशराम ब्रह्म ने बताया कि महाराज देव ब्रह्म के बाद मनी ब्रह्म और चंद्र ब्रह्म को यहां का राजा बनाया गया था. वक्त वितता गया और राजतंत्र खत्म हो गया. इसके साथ राज परिवार के ज्यादातर सदस्य बाहर रहने चले गए. अब वो यदा-कदा छुट्टियां मनाने ही यहां पहुंचते हैं, लेकिन इलाके में आज भी इनकी प्रतिष्ठा काफी है.
दीवारों में छुपे हैं रहस्य
यह महल अब खंडहर में तब्दील जरूर हो गया है, लेकिन इस महल की दीवारों में अब भी कई रहस्य छुपे हुए हैं. वहीं इस खंडहर की दीवार की नक्काशी आज भी देखने लायक है. जो गोड्डा के प्राचीनतम राजघरानों के समृद्धि और कलाकृतियों को दर्शाता है. आज भी लोग खास तौर पर इसे देखने आते हैं. राजघराने के वंशजों से मिली जानकारी के मुताबिक बारकोप स्टेट का साम्राज्य काफी समृद्ध था.