आज दिनांक 24 सितंबर को dr श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के एनएसएस विंग के द्वारा एनएसएस के 54वें स्थापना दिवस के मौके पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मौके पर जनजातीय सामूहिक नृत्य, एकल गीत, कथक नृत्य और सामूहिक नृत्य और एनएसएस वोलेंटियर के द्वारा एनएसएस से सबंधित नाट्य प्रस्तुति दी गई। इसके पूर्व द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रमों की शुरुआत की गई। स्वागत भाषण और विषय प्रवेश एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ अभय कृष्ण सिंह ने किया। मुख्य अतिथि और अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि एनएसएस युवाओं को सामुदायिक सेवा के लिए उन्मुख करता है उन्होंने आगे कहा कि प्रारंभ में 37 विश्वविद्यालयों और40, 000 स्वयंसेवियों के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज दिन प्रतिदिन प्रगति की ओर अग्रसर है।

उन्होंने एनएसएस के प्रमुख उद्देश्यों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह हमें आपस में सामाजिक और नागरिक जिम्मेवारी की भावना विकसित करने में सहायता प्रदान करता है। यह इस बात पर बल देता है कि एनएसएस से जुड़ा विद्यार्थी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं का व्यवहारिक हल खोजने में अपने ज्ञान का प्रयोग करें। इसके अलावा यह सामूहिकता और सहयोग की भावना में भी उत्तरोत्तर वृद्धि करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में अपनी भागदारी कर अपने व्यक्तित्व विकास की क्षमता में गुणात्मक परिवर्तन लाए।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में झारखंड ओपेन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ टी एन साहू ने एनएसएस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चारित्रिक विकास के साथ साथ उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए जागरूक करने का कार्य करता है। आज आवश्यकता इस बात की है कैसे अधिकाधिक विद्यार्थियों को इससे जोड़ा जाए। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन dr विनय भरत ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के एनएसएस विंग के सभी सदस्य और विद्यार्थियों की मौजूदगी रही। यह जानकारी पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी










