झारखंड के पलामू जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 251 अनुसेवकों को बर्खास्त कर दिया गया है, जिससे राज्य में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में चौथे दर्जे की बहाली को अवैध करार देते हुए यह निर्णय लिया। इस बहाली प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगा था, जिसकी वजह से यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। प्रभावित अनुसेवकों में से 239, राजेंद्र राम के नेतृत्व में, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुके हैं। इस बर्खास्तगी के आदेश से कई दिव्यांग और सेवा निवृत्ति के करीब कर्मचारी भी प्रभावित हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पलामू डीसी ने सभी 251 अनुसेवकों को बर्खास्त कर दिया। 22 फरवरी को पत्र जारी हुआ, और 23 फरवरी को यह आधिकारिक रूप से कर्मचारियों को सूचित किया गया। इस फैसले के विरोध में प्रभावित कर्मचारियों ने पलामू के शिवाजी मैदान में इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं की, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि झारखंड के अन्य जिलों में भी इसी तरह की बहाली हुई थी, लेकिन कुछ अनुसेवकों को हटाया गया, जबकि कुछ को नहीं, जिससे यह फैसला विवादित बन गया है।
इस विवादित मामले ने राज्य में राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ा दिया है। प्रभावित कर्मचारियों ने अपनी नौकरियों की बहाली की मांग की है और उच्च न्यायालय में अपनी पुनर्विचार याचिका के माध्यम से न्याय पाने की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित समाधान निकालना चाहिए ताकि उनकी आजीविका और सम्मान की रक्षा हो सके।










