धनबाद : लोगों की प्यास बुझे इसलिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल विभाग की ओर से जल शोध संस्थान का निर्माण करवाती है। इसके लिए बकायदा समय सीमा भी तय की जाती है, लेकिन फेज टू में चल रहे जल शोध संस्थान का काम धीमा है। धीमा इसलिए है क्योंकि इस संस्थान में काम कम मदिरापान ज्यादा होता है। बिल्डिंग परिसर में पानी की बोतलों से ज्यादा शराब की बोतले हैं। जो यह बताने के लिए काफी है की यहां जब मन तब कांट्रेक्टर के लो जाम छलकता है।

परिसर में हर जगह शराब बोतलें की अंबार
यह पूरा बिल्डिंग और पूरा परिसर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल विभाग का है, जिसमें जल शोध संस्थान का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन इस परिसर में कांट्रेक्टर की टीम काम कम शराब का सेवन ज्यादा कर रही है। यह हम नहीं बल्कि यह तस्वीरें बयां कर रही है। बिल्डिंग के परिसर में कई सारी शराब की बोतलें दिखाई दे रही है। इस जल शोध संस्थान के भरोसे आसपास के 26 गांव हैं, जिनको पानी मिलना था लेकिन कार्य में कोताही बरतने के कारण आज यहां के ग्रामीण प्यासे हैं।

ग्रामीणों ने जल शोध संस्थान में जाकर जमकर किया हंगामा
बढ़ते भीषण गर्मी में प्यास को देखते हुए ग्रामीणों ने बलियापुर प्रखंड के कुसमाटांड पंचायत भवन के समीप फेत टू के तहत बनाए गए जल शोध संस्थान में जाकर जमकर हंगामा किया। वहीं कॉन्ट्रेक्टर को लापरवाही पर जमकर फटकार भी लगाई। जिसके बाद ग्रामीणों ने 15 दिन का समय देकर कंपनी को जल्द से जल्द काम पूरा करने की चेतावनी दी।
5 साल के अंदर तैयार करना था जलमीनार, लेकिन अभी तक नहीं हुआ शुरू
सरकार ने 68 करोड़ की राशि स्वीकृति कर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल विभाग की और से जल शोध संस्थान फेज टू के तहत निर्माण करने के लिए निर्गत किया था। इस जल मीनार को 5 सालों के अंदर कंपनी को तैयार करके ग्रामीणों को यहां से पानी सप्लाई देना शुरू कर देना था, लेकिन आज समय सीमा पार कर गया और कांट्रेक्टर की लापरवाही के कारण आज इस भीषण गर्मी में 26 गांव के ग्रामीण बूंद बूंद को तरस रहे हैं। यहां कांट्रेक्टर पानी के काम को छोड़कर मदिरापान में मस्त हैं।
सातवें आसमान पर है कांट्रेक्टर का मनोबल
बहरहाल इनकी बातों से तो साफ है कि इनका मनोबल सातवें आसमान पर है। जरूरत है कि ऐसे कंस्ट्रक्शन कंपनियों के खिलाफ विभाग को कठोर से कठोर कार्रवाई करने की, ताकि इनकी लापरवाही की खामियाजा भोली भाली ग्रामीणों को भुगतना ना पड़े।









