रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड में नावाजारा से रायपुरा को जोड़ने वाले 3.775 किलोमीटर लंबे पथ की मरम्मत का कार्य सागर आनंद कंस्ट्रक्शन द्वारा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना की प्राक्कलित लागत 93.743 लाख रुपये है, लेकिन ग्रामीणों ने कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क मरम्मत में फैक्ट्री का डस्ट, इमोशन, अलकतरा और मोटी गिट्टी के उपयोग में भारी अनियमितता बरती जा रही है। पहले किए गए पीसीसी पथ के निर्माण में भी संवेदक द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण सड़क जगह-जगह टूट गई और दरारें पड़ गईं। ग्रामीणों ने इस कार्य को बीच गांव में अधूरा छोड़ने की भी शिकायत की है।
ग्रामीणों का गुस्सा तब और बढ़ गया जब उन्होंने सड़क मरम्मत में डस्ट की अत्यधिक मात्रा और घटिया सामग्री के इस्तेमाल को देखा। विरोध करने पर संवेदक ने ग्रामीणों को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश और बढ़ गया। कारु मुंडा, दिनेश मुंडा, राजेश महतो, धनंजय महतो, नंदलाल मुंडा, गोलक मांझी, प्यारेलाल मांझी सहित कई ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने मांग की कि सागर आनंद कंस्ट्रक्शन द्वारा किए जा रहे इस कार्य की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी लापरवाही न केवल उनके दैनिक आवागमन को प्रभावित कर रही है, बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग है।

यह विरोध पीएमजीएसवाई जैसी महत्वाकांक्षी योजना में गुणवत्ता और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि सड़क निर्माण में मानकों का पालन हो और गांव वालों को सुरक्षित और टिकाऊ सड़क मिल सके। इस घटना ने एक बार फिर संवेदकों और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों की एकता और उनके द्वारा उठाई गई आवाज इस बात का प्रमाण है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार हैं। इस मामले में जांच और कार्रवाई का इंतजार अब पूरे क्षेत्र को है।
-रिपोर्टर: कुमार मिश्रा