रांची : रांची के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए उनके चित्र पर माल्यार्पण किया गया। DSPMU के कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने डॉक्टर श्याम प्रसाद मुखर्जी के बारे में बताया कि वह एक प्रखर राजनीतिज्ञ थे।
1934 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनें
“एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे” का नारा देने वाले, कम उम्र में ही राजनीतिक चरमोत्कर्ष को प्राप्त करने वाले और राष्ट्रीय एकता और अखंडता के पर्याय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता में हुआ। मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में 1934 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनें । उन्होनें उनके व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि वे देश की समग्रता पर विश्वास करते हुए, एक राष्ट्र, एक विधान की बात के साथ ही उन्होंने 8 मई 1953 को बगैर किसी अनुमति के कश्मीर की यात्रा प्रारंभ कर दी।

भारतीय जनसंघ नामक पार्टी का गठन किया
कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने उनके विलक्षण प्रतिभा के विषय में आगे कहा कि उनकी धारणा थी कि हममें कोई अंतर नही है। हम सब एक ही रक्त के हैं, एक भाषा , एक संस्कृति और एक ही हमारी विरासत है। वो सारे लोगों के सामूहिक हित के पोषक थे। उन्होंने उनके राजनैतिक जीवन की चर्चा करते हुए कहा 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ नामक पार्टी का गठन किया।
इससे पूर्व सभी शिक्षकों और कर्मियों ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ नमिता सिंह, वित्त पदाधिकारी डॉ आनंद कुमार मिश्र, प्रियांश कुमार समेत सभी शिक्षक, कर्मी और विद्यार्थी मौजूद थे।
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