रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 122वीं जयंती के अवसर पर आज डीएसपीएमयू में एक समारोह सह सेमिनार का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी और डिपार्टमेंट ऑफ ईएलएल के संयुक्त सौजन्य से किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तपन कुमार शांडिल्य, कुलसचिव डॉ. नमिता सिंह, विशिष्ट अतिथि के तौर पर आमंत्रित झारखंड ओपन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. टीएन साहू ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत विषय प्रवेश और स्वागत भाषण के द्वारा कुलसचिव डॉ.नमिता सिंह ने किया। मुख्य अतिथि और वक्ता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. तपन कुमार शांडिल्य ने झारखंड की भूमि को नमन करते श्यामा प्रसाद मुखर्जी को स्मरण किया। कुलपति डॉ. तपन कुमार शांडिल्य ने आज के संदर्भ में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को प्रासंगिक और रेखांकित करते हुए कहा कि आज भी उनकी परिकल्पना का राष्ट्र बनना बांकी है।
उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को देखते हुए इस विश्वविद्यालय का नाम डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रखा जाना हमें गौरवान्वित करता है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन वृत्त की चर्चा करते हुए कहा कि वह 24 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य बने। गणित के अध्ययन के लिए विदेश गए और लंदन मैथमेटिकल सोसाइटी ने उन्हें सम्मानित सदस्य बनाया। कुलपति के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को पहली बार बंगाली भाषा में संबोधित किया।
संसार को बचाने के लिए भारत का एक रहना जरुरी
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम सब एक है। इसलिए धर्म के आधार पर वे विभाजन कट्टर विरोधी थे। उनका यह मानना था कि संसार को बचाने के लिए भारत का एक रहना और शक्ति संपन्न होना अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को सन्देश देते हुए यह कहा कि डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व को समझने के लिए विद्यार्थियों को ‘डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं कश्मीर की समस्या’ पुस्तक का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर झारखंड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. टीएन साहू ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के व्यक्तित्व से सीख लेने की सलाह देते हुए कहा कि उनके जीवनवृत्त का अध्ययन करने से एक बात स्पष्ट होती है कि उनके कार्यप्रणाली में काफी संकल्पित उद्देश्य निहित रहते थे। कार्यक्रम में डीन, साइंस डॉ. ईश्वरी प्रसाद गुप्ता और डॉ. अभय कृष्ण सिंह ने भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ.शालिनी लाल ने किया। मंच संचालन डॉ. विनय भरत और सौरव कुमार ने किया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
मौके पर कुलसचिव डॉ. नमिता सिंह, डीन साइंस डॉ. ईश्वरी प्रसाद गुप्ता, डॉ.अशोक नाग, डॉ. विनय भरत, डॉ. शमा सोनाली, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. जिंदर सिंह मुंडा, डॉ. गीतांजलि सिंह, कन्हैया कुमार, डॉ. जेपी शर्मा सहित सभी शिक्षक और कर्मी मौजूद थे। यह जानकारी पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी।










