झारखंड के 60,000 सहायक शिक्षकों ने इंक्रीमेंट न मिलने पर गहरा रोष जताया है। जनवरी 2024 से मिलने वाले 4% वार्षिक इंक्रीमेंट को रोकने के राज्य परियोजना परिषद रांची के मौखिक आदेश ने शिक्षकों में असंतोष पैदा कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि यह आदेश अन्यायपूर्ण है और उनके अधिकारों का हनन है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।
राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वित्तीय संकट के कारण इंक्रीमेंट को रोकना पड़ा है। सरकार ने शिक्षकों से धैर्य रखने की अपील की है और कहा है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि वे पहले ही कई बार धैर्य दिखा चुके हैं और अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
जनता की प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही है। कुछ लोग शिक्षकों के समर्थन में हैं और उनका कहना है कि शिक्षकों को उनका हक मिलना चाहिए। वहीं, कुछ लोग इसे सरकार के खिलाफ एक राजनीतिक चाल मान रहे हैं। शिक्षकों की मांगें स्पष्ट हैं: उन्हें उनका इंक्रीमेंट तुरंत दिया जाए और भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए एक स्थायी समाधान निकाला जाए।










