हेमंत सोरेन सरकार ने अपने चुनावी घोषणा को साकार करते हुए राज्य में अब तक 4.68 लाख किसानों का पचास हजार रुपये तक का ऋण माफ कर दिया है। सरकार ने कहा है कि बैंक ऐसे लाभुक किसानों का सत्यापन कर उनकी जानकारी साझा करें तो सरकार उनका भी पचास हजार रुपये तक का ऋण माफी के लिए बैंक को राशि देगी।
लाभुक किसानों का उनके घर-घर जाकर सत्यापन
राज्य में चालीस हजार ऐसे लाभुक किसान है, जिनका पचास हजार रुपये तक का ऋण माफ नहीं हो पाया है। विभाग के जानकारों की माने तो ये ऐसे लाभुक किसान हैं, जिनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है। अब सरकार ने इसकी जिम्मेदारी बैंकों को सौंप दी है। बैंक अब लाभुक किसानों का उनके घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं। कई जगहों पर लाभुक के नहीं होने की भी समस्या आ रही है। इसके पीछे आजीविका के लिए प्रदेश बाहर होने भी बताया जा रहा है। बैंक अगर सभी दस्तावेजों का सत्यापन पूरी कर सरकार को सौंपे, तो बैंकों को ऋण वापसी की राशि प्रदान की जाएगी। इसको लेकर जल्द ही बैंक और विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक होनी है। जिसमें जानकारी आदान-प्रदान की जाएगी।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य गठन के बाद से मार्च 2020 तक 3.02 लाख लाभुक किसानों के खाते एनपीए होने की कगार पर हैं। हालांकि इसका आंकड़ा अभी बढ़ने की संभावना है। इस मामले में सरकार के अधिकारी बैंकों के साथ बैठक कर मामले का हल निकालने की कोशिश करने वाले हैं, ताकि इन खातों को एनपीए होने से बचाया जा सके। इसके पीछे किसानों को मिले ऋण के सही इस्तेमाल नहीं होने और उनकी किस्त नहीं जमा करना कारण बताया जा रहा है।










