ग्लोबल शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर की कंपनियों पर तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। 2026 के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर (Highs) से लेकर अब तक एआई से जुड़ी दिग्गज कंपनियों की मार्केट वैल्यू में से रिकॉर्ड $13.2 ट्रिलियन (लगभग 1,100 लाख करोड़ रुपये) पूरी तरह साफ हो चुके हैं। इस नुकसान के विशाल पैमाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया में केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन ही दो ऐसे देश हैं जिनकी वार्षिक जीडीपी इस स्वाहा हुई राशि से अधिक है। बाजार में आया यह भूचाल अब महज एक मामूली सुधार (Correction) न होकर एआई इंडस्ट्री के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट बन चुका है।
बाजार में मचे इस तांडव की चपेट में दुनिया की सबसे बड़ी टेक दिग्गज कंपनियां आ चुकी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) को $1.62 ट्रिलियन (-32%) का झटका लगा है, जबकि एआई चिप्स की बेताज बादशाह एनवीडिया (Nvidia) ने $1.49 ट्रिलियन (-25%) की मार्केट वैल्यू गंवा दी है। इसके अलावा ब्रॉडकॉम ($965 बिलियन), सेमीकंडक्टर दिग्गज TSMC ($700 बिलियन), माइक्रोन ($678 बिलियन) और मेटा ($501 बिलियन) के शेयर भी धड़ाम हो चुके हैं। चिप सप्लाई चेन से लेकर मेमोरी स्टॉक्स में हुई इस चौतरफा बिकवाली से पूरी टेक दुनिया स्तब्ध है।
यह महामंदी केवल चुनिंदा टेक स्टॉक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे एआई इकोसिस्टम की कमर तोड़ कर रख दी है। एआई सॉफ्टवेयर क्षेत्र में औसत 36% और एआई चिप्स में 43% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि डेटा सेंटर्स (-50%), एआई पावर इंफ्रास्ट्रक्चर (-53%) और मेमोरी स्टॉक्स (-60%) सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर हार्डवेयर सप्लायर्स तक फैली इस चौतरफा गिरावट ने वैश्विक निवेशकों की नींद उड़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एआई ट्रेड का यह अब तक का सबसे कठिन दौर है, जो टेक बबल के फटने और नए वित्तीय संकट की ओर इशारा कर रहा है।










