झारखंड और संयुक्त बिहार के पुलिस महकमे में अपनी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और कुशल नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले 1985 बैच के पूर्व वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी श्री विद्यानंद मिश्रा का आकस्मिक निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और रांची के ऑर्किड्स अस्पताल में उनका इलाज जारी था, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की दुखद सूचना 31 मई 2026 को प्राप्त हुई। उनके निधन की खबर फैलते ही एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर (ARIPSO) और पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है। स्वर्गीय मिश्रा अपने पीछे पत्नी श्रीमती शांति मिश्रा, चार पुत्रियों और एक पुत्र दीपक मिश्रा (जो रांची में ‘प्रभात खबर’ के संपादकीय विभाग में कार्यरत हैं) सहित एक भरा-पूरा हंसता-खेलता परिवार छोड़ गए हैं।

मूल रूप से दरभंगा के हरिहरपुर गांव में 1 नवंबर 1944 को जन्मे श्री विद्यानंद मिश्रा की प्रारंभिक शिक्षा जिला स्कूल, रांची से हुई थी, जिसके बाद उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में एमए किया। उनके पिता स्व० ताम्रपति मिश्रा एक स्वतंत्रता सेनानी थे। श्री मिश्रा का चयन वर्ष 1975 में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के 21वें बैच में पुलिस उपाध्यक्ष (DSP) के पद पर हुआ था। संयुक्त बिहार के दौर में उन्होंने वर्ष 1978 से 1984 तक रांची में सिटी डीएसपी के रूप में बेहद सराहनीय सेवाएं दीं। इसके बाद पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर प्रोन्नत होकर उन्होंने 1984 से 1989 तक गोड्डा के पुलिस अधीक्षक के रूप में कमान संभाली। झारखंड अलग राज्य बनने के बाद भी उन्होंने कई जिलों में अपनी उत्कृष्ट कार्यक्षमता का परिचय दिया और वर्ष 2004 में होमगार्ड एवं अग्निशमन विभाग से डीआईजी (DIG) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

अपने शानदार सेवाकाल के दौरान उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए श्री विद्यानंद मिश्रा को सरकार द्वारा ‘पुलिस मेडल’ और महामहिम राष्ट्रपति द्वारा ‘राष्ट्रपति पुलिस पदक’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे ‘भारतीय पुलिस से०नि० परिवार (ARIPSO) झारखंड’ के लिए सदैव सक्रिय रहे और संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दिया। उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए ARIPSO परिवार के अध्यक्ष ने कहा कि उनका अनुशासित व्यक्तित्व, अदम्य साहस और मानवीय व्यवहार आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणाश्रोत रहेगा। आज पूरा सेवानिवृत्त आईपीएस परिवार उनकी पावन स्मृति को नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है और शोक संतप्त परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना करता है।











