- झार जल पोर्टल की समीक्षा में उपायुक्त सख्त, लंबित शिकायतों के त्वरित निष्पादन के दिए निर्देश
- रविवार तक सभी लंबित मामलों का समाधान कर प्रगति प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश, 9 जून को मुख्यमंत्री करेंगे राज्यस्तरीय समीक्षा
गढ़वा। जिले में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ एवं शिकायतों के त्वरित निष्पादन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने अपने कार्यालय कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से झार जल पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने ग्रीष्म ऋतु में आमजन को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों एवं पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संभावित पेयजल संकट की स्थिति से निपटने के लिए प्रखंड स्तर पर मिस्त्रियों, मुखियाओं, पंचायत सचिवों, कनीय अभियंताओं एवं अन्य संबंधित कर्मियों के साथ नियमित समन्वय स्थापित कर आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं।

बैठक में बताया गया कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा आमजनों की शिकायतों के त्वरित समाधान हेतु झार जल पोर्टल का संचालन किया जा रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर 1800-3456-502, मोबाइल एप, व्हाट्सएप नंबर 9470176001 एवं ई-मेल के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, गढ़वा अजय कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार दिनांक 05 जून 2026 तक विभागीय लॉग-इन में कुल 1752 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें चापाकल मरम्मती से संबंधित 1323, लघु जलापूर्ति योजना से संबंधित 332, वृहत जलापूर्ति योजना से संबंधित 18, पाइपलाइन लीकेज से संबंधित 14, पेयजल आपूर्ति से संबंधित 19, जल गुणवत्ता से संबंधित 13, शौचालय एवं स्वच्छता से संबंधित 5 तथा अन्य श्रेणी के 26 मामले शामिल हैं।
प्राप्त शिकायतों में से 1508 मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है। वहीं 2 मामलों को अस्वीकृत किया गया है तथा 20 मामलों को शिकायतकर्ताओं द्वारा वापस ले लिया गया है। 12 मामलों में अग्रेतर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है, जबकि 84 शिकायतें अभी भी विभागीय स्तर पर लंबित हैं। इसके अतिरिक्त 120 मामले विभिन्न प्रखंड विकास पदाधिकारियों के लॉग-इन में लंबित पाए गए।
लंबित मामलों की संख्या पर उपायुक्त ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने स्तर पर लंबित शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें तथा रविवार तक सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि निष्पादित मामलों की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध कराई जाए, ताकि जिला स्तर पर समेकित प्रतिवेदन तैयार कर मुख्यालय को समय पर भेजा जा सके।
उपायुक्त ने कहा कि दिनांक 09 जून 2026 को माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के सभी जिलों में ग्रीष्म ऋतु के दौरान पेयजल उपलब्धता एवं विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की जाएगी। ऐसे में सभी संबंधित पदाधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरतापूर्वक निर्वहन करते हुए शत-प्रतिशत शिकायतों के निष्पादन की दिशा में कार्य करें।
श्री मिश्रा ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंताओं के साथ नियमित बैठक कर क्षेत्रवार कार्यों की समीक्षा करें तथा झार जल पोर्टल की लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मुखिया, पंचायत सचिव एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद स्थापित कर खराब पड़े चापाकलों की जानकारी प्राप्त की जाए और आवश्यकतानुसार उनकी मरम्मत कराकर चालू कराया जाए।
उपायुक्त ने बताया कि विभाग द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि से आवश्यकतानुसार नए चापाकलों की स्थापना का भी निर्देश दिया गया है। ऐसे स्थान जहां पेयजल संकट की संभावना हो, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि आमजनों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
बैठक में जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई कि पेयजल से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर झार जल पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं, ताकि विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए समस्या का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि गर्मी के मौसम में प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इस दिशा में सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं।










