- समाहरणालय सभागार में पेसा नियमावली-2025 पर जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित
- गढ़वा के भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंडों में पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत मंथन
गढ़वा। दिनांक 05 जून 2026 को पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 (पेसा नियमावली) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से आज समाहरणालय स्थित सभागार में एक दिवसीय जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

यह महत्वपूर्ण नियमावली गढ़वा जिले के अनुसूचित क्षेत्र अंतर्गत आने वाले भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंडों में लागू होगी। सम्मेलन के दौरान पेसा नियमावली के विभिन्न प्रावधानों, ग्राम सभाओं की भूमिका, स्थानीय संसाधनों पर समुदाय के अधिकार, पारंपरिक व्यवस्थाओं के संरक्षण तथा जनभागीदारी आधारित विकास की अवधारणा पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त प्रेमलता मुर्मू, अपर समाहर्ता विकास कुमार राय, वन प्रमंडल पदाधिकारी (सामाजिक वानिकी), प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी भंडरिया एवं बड़गड़, कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल, कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई, जिला खनन पदाधिकारी, जिला उत्पाद अधीक्षक, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी,पणन सचिव कृषि उत्पाद बाजार समिति, डीपीएम जेएसएलपीएस, डीपीएम जिला पंचायत राज, राज्य स्तर से आए प्रतिनिधिगण सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

इस अवसर पर *उपायुक्त श्री मिश्रा ने कहा कि* पेसा नियमावली अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी एवं स्थानीय समुदायों के अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में रखकर विकास योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना इस नियमावली का मूल उद्देश्य है। उन्होंने सभी विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पेसा नियमावली के प्रावधानों को गंभीरता से समझते हुए भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंडों में इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समन्वित प्रयास करें, ताकि स्थानीय समुदायों को इसका वास्तविक लाभ प्राप्त हो सके।
उन्होंने आगे कहा कि पेसा नियमावली केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की परंपराओं, संस्कृति, रीति-रिवाजों एवं प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों को संरक्षित और सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि भंडरिया एवं बड़गड़ जैसे अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाकर विकास की योजनाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं जन-केंद्रित बनाया जा सकता है।
उपायुक्त ने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि पेसा नियमावली के प्रावधानों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता के साथ विकास की प्रक्रिया को नई गति मिले। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पेसा नियमावली का सफल क्रियान्वयन जिले में समावेशी विकास एवं सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
उप विकास आयुक्त श्रीमती मुर्मू ने कहा कि पेसा नियमावली ग्राम स्वशासन की अवधारणा को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित हो। उन्होंने अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय एवं सशक्त बनाने की दिशा में कार्य करें तथा पेसा के प्रावधानों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
अपर समाहर्ता श्री राय ने कहा कि पेसा नियमावली प्रशासन और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सामाजिक न्याय तथा पारंपरिक अधिकारों की रक्षा में ग्राम सभाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संबंधित विभागों को नियमावली के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने तथा सभी प्रक्रियाओं में ग्राम सभा की सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
सम्मेलन के दौरान राज्य स्तर से आए विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों द्वारा पेसा नियमावली, 2025 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही उपस्थित पदाधिकारियों एवं प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित कर उनके सुझाव एवं विचार भी प्राप्त किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में सुशासन, पारदर्शिता, जनभागीदारी तथा स्थानीय स्वायत्तता को बढ़ावा देना रहा।
जिला प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि पेसा नियमावली, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन से भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंडों में ग्राम सभाओं की भूमिका और अधिक सशक्त होगी तथा स्थानीय समुदायों के अधिकारों एवं विकास को नई दिशा मिलेगी।










