- *गढ़वा में वन हेल्थ एवं जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (DJORT) के गठन को मिली मंजूरी, मानव-पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बनेगा संयुक्त तंत्र*
- *संक्रामक एवं पशुजनित बीमारियों पर रहेगी पैनी नजर, चार विशेष टीमों के माध्यम से होगी त्वरित निगरानी एवं कार्रवाई*
- *मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सभी विभाग मिलकर करेंगे काम, रोगों की समयपूर्व पहचान एवं त्वरित नियंत्रण पर विशेष जोर*
- *उपायुक्त ने कार्ययोजना को दी मंजूरी, सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश*
- *रोगों की समयपूर्व पहचान और रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन की बड़ी पहल, वन हेल्थ एवं DJORT के जरिए मजबूत होगी जनस्वास्थ्य सुरक्षा*
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गढ़वा। गढ़वा जिले में संक्रामक एवं पशुजनित (जूनोटिक) बीमारियों की समयपूर्व पहचान, प्रभावी निगरानी तथा त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में आज समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय वन हेल्थ (One Health) समिति एवं जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (District Joint Outbreak Response Team-DJORT) के गठन एवं प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन हेल्थ की अवधारणा को जिले में प्रभावी रूप से लागू करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने से संबंधित प्रस्तुत सभी प्रस्तावों एवं कार्ययोजना को उपायुक्त द्वारा अनुमोदित किया गया।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों, झारखंड सरकार के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग तथा जिला स्तर से निर्गत संबंधित पत्रों के आलोक में आयोजित इस बैठक में जिला महामारी विशेषज्ञ (District Epidemiologist), IDSP, डॉ. संतोष कुमार मिश्रा ने विस्तृत पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वन हेल्थ की अवधारणा, राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम (NOHPPCZ), जिले की महामारी निगरानी व्यवस्था, हाल के संक्रामक रोगों के प्रकोप तथा DJORT की संरचना एवं कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी दी।
- *मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समन्वय पर आधारित है वन हेल्थ की अवधारणा*
बैठक में बताया गया कि वन हेल्थ एक समन्वित एवं बहुक्षेत्रीय अवधारणा है, जिसके तहत मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानते हुए रोगों की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, निगरानी एवं नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों को एक साझा मंच पर लाया जाता है। इसके अंतर्गत रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, एंथ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस, वेक्टर जनित रोगों तथा जल एवं खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम एवं नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रस्तुतीकरण के दौरान IHIP/IDSP पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जिले की वर्तमान निगरानी स्थिति से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि सिंड्रोमिक निगरानी के अंतर्गत 3,098 मामले, प्रिजम्प्टिव निगरानी में 1,564 मामले तथा प्रयोगशाला जांच के तहत 955 व्यक्तियों के कुल 1,011 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 49 नमूने पॉजिटिव पाए गए।
वहीं, वर्ष 2026 में जिले में विभिन्न बीमारियों से संबंधित कुल 12 प्रकोप की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 80 मामले एवं 3 मृत्यु दर्ज हैं। इन घटनाओं में लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, डेंगू, चिकनपॉक्स, संदिग्ध खाद्य विषाक्तता एवं अन्य ज्वर संबंधी मामले शामिल हैं।
बैठक में जिले में अब तक दर्ज 1,620 डॉग बाइट के मामलों को गंभीरता से लेते हुए रेबीज की रोकथाम, एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता, पशुओं के टीकाकरण तथा स्वास्थ्य एवं पशुपालन विभाग के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
- *DJORT के तहत चार विशेष टीमों का होगा गठन*
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिला संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (DJORT) को चार विशेष टीमों में संगठित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। इन टीमों की जिम्मेदारियां निम्नवत निर्धारित की गई हैं–👇
1. *Food & Water Borne Disease Team:* खाद्य विषाक्तता, डायरिया, हैजा, टाइफाइड एवं दूषित भोजन-पानी से होने वाले प्रकोपों की जांच, निगरानी एवं नियंत्रण।
2. *Vector Borne Disease Team:* मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस आदि वेक्टर जनित रोगों की निगरानी एवं रोकथाम।
3. *Vaccine Preventable Disease Team:* खसरा-रूबेला, पोलियो, डिप्थीरिया, काली खांसी एवं अन्य टीकाकरण से रोके जा सकने वाले रोगों की निगरानी एवं नियंत्रण।
4. *Zoonotic Disease Team:* रेबीज, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस, एंथ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस एवं अन्य पशुजनित रोगों की संयुक्त जांच एवं नियंत्रण।
इन विशेष टीमों में स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों एवं चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ-साथ पशुपालन, कृषि, वन एवं वन्यजीव, पेयजल एवं स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण तथा अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित प्रकोप की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
- *उपायुक्त ने दिए समयबद्ध एवं समन्वित कार्रवाई के निर्देश*
उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने वन हेल्थ एवं DJORT से संबंधित सभी प्रस्तावों का अनुमोदन करते हुए कहा कि मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। इसलिए संक्रामक एवं जूनोटिक बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभागों का आपसी समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिया कि मानव, पशु अथवा पर्यावरण से संबंधित किसी भी संभावित रोग प्रकोप की सूचना संबंधित विभागों के बीच अविलंब साझा की जाए। आवश्यकता पड़ने पर सभी संबंधित विभाग संयुक्त रूप से क्षेत्रीय जांच, रोग की पहचान एवं नियंत्रण की कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही विभागीय नोडल पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करते हुए सूचना के त्वरित आदान-प्रदान एवं नियमित समीक्षा की व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया।
बैठक में जिला स्तरीय वन हेल्थ समिति के माध्यम से सभी संबंधित विभागों को एक साझा मंच पर लाने, नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने तथा किसी भी प्रकोप की स्थिति में DJORT को तत्काल सक्रिय करने की कार्यप्रणाली पर सहमति बनी।
- *90 दिनों में वन हेल्थ व्यवस्था को धरातल पर उतारने की कार्ययोजना*
बैठक में वन हेल्थ एवं DJORT के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आगामी 90 दिनों की चरणबद्ध कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई। इसके तहत–
*प्रथम चरण:* जिला स्तरीय समिति एवं DJORT की संस्थागत व्यवस्था सुनिश्चित करना, विभागीय नोडल पदाधिकारियों का नामांकन तथा सूचना साझा करने की प्रभावी प्रणाली विकसित करना।
*द्वितीय चरण:* संबंधित विभागों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण, टेबलटॉप अभ्यास, प्रकोप की जांच एवं रेफरल व्यवस्था को सुदृढ़ करना।
*तृतीय चरण:* संयुक्त क्षेत्रीय अभ्यास आयोजित करना, जोखिम संचार (Risk Communication) को प्रभावी बनाना तथा अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा करना।
इस दौरान स्पष्ट किया गया कि वन हेल्थ केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पशुपालन, कृषि, वन, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा, पेयजल एवं स्वच्छता, पंचायती राज, समाज कल्याण सहित सभी संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
- *जनस्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बनेगी मजबूत समन्वित व्यवस्था*
बैठक में विश्वास व्यक्त किया गया कि जिला प्रशासन के नेतृत्व में वन हेल्थ एवं DJORT की प्रभावी व्यवस्था स्थापित होने से जिले में संक्रामक एवं पशुजनित रोगों की समयपूर्व पहचान, बेहतर महामारी निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया तथा प्रभावी नियंत्रण को नई मजबूती मिलेगी। विभिन्न विभागों के सामूहिक प्रयास से संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को समय रहते पहचानने और आमजनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी, दक्षिणी, एबिन बेनी अब्राहम, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तरी, अंशुमान राजहंस, सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कैनेडी, जिला सर्विलांस पदाधिकारी डॉ. पुष्पा सहगल, DFO सामाजिक वानिकी चतुरानंद त्रिपाठी, प्रभारी जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. बारबुडे, जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, गढ़वा, दीप श्री, DPM गौरव कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग एवं विभिन्न संबद्ध विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।










