रांची : जो जुर्म आपने किया ही नहीं, लेकिन आपको दोषी मानकर सजा दे दी जाए, तो क्या होगा, और आपके परिवार का क्या होगा? कहा जाता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, जिससे कोई अपराधी बच नहीं सकता है। लेकिन इस कहानी में कानून के हाथ छोटे भी हो गए और अंधा हो गया, जिसमें एक बेगुनाह को सजा मिल गई और वो लगभग एक साल तक जेल में रहा।
यह कहानी है राजधानी रांची स्थित धुर्वा डैम के रहने वाले 3 लड़कों की। जिसे बिना किसी जुर्म के ही सजा मिल गई। तीनों युवक का नाम अजीत, अमरजीत और अभिमन्यु है। जिसने कोई जुर्म की नहीं किया लेकिन उसे सजा हो गई।
जानिए पूरा मामला
यह पूरा मामला 15 फरवरी 2014 का है। रांची के चुटिया इलाके की रहने वाली एक लड़की प्रीति कुमारी अपने घर से गायब हो जाती है, गुमशुदगी के एक दिन बाद रांची जिले के ही बुंडू थाना क्षेत्र में एक लड़की की अधजली लाश मिलती है, जिसका बिना डीएनए टेस्ट कराए ही पुलिस उसे प्रीति कुमारी मान लेती है, लड़की का पिता भी उस लाश को देखकर अपनी बेटी की पुष्टि कर लेता है, तीनों लड़कों को दुष्कर्म और हत्या का आरोपी मान सजा मिल जाती है।
समाजसेवी राजीव कुमार सिंह ने निभाया अहम रोल
इस पूरे प्रकरण में यदि कांके रोड निवासी समाजसेवी राजीव कुमार सिंह सामने नहीं आते और प्रीति कुमारी का पता नहीं लगाते तो शायद आज भी तीनों लड़के उम्र कैद की सजा काट रहे होते या फिर उन्हें फांसी हो जाती।
ऐसे मिली युवती
बता दें कि पुलिस ने बिना उचित अनुसंधान किए इस पूरे मामले में तीनों लड़कों को दोषी करार दिया और उन पर मामला दर्ज करते हुए सजा दिलाई। मगर रांची के कांके रोड निवासी समाजसेवी राजीव कुमार सिंह को गुप्त सूत्रों से पता चला कि जिस लड़की को मृत मान लिया गया है वह लड़की पलामू में कई माह से छुपकर रह रही थी और रांची आई हुई है। समाजसेवी राजीव सिंह ने रांची स्थित रिम्स के इमरजेंसी के बाहर से लड़की को ढूंढ़ा और तत्कालीन ग्रामीण एसपी सुरेंद्र झा से लड़की की बात कराई और फिर उसे ग्रामीण एसपी के कार्यालय ले गए।
प्रीति ने जिंदा रहने की जानकारी अपने परिजनों को दी
इस दौरान लड़की ने समाजसेवी राजीव सिंह को बताया कि अखबार के जरिए उसे पता चला कि तीनों लड़कों को दुष्कर्म और हत्या का आरोपी मानकर सजा हुई है, तो उसने अपने परिजनों को दूरभाष से सूचना दी और कहा कि मैं जिंदा हूं और वह लड़के निर्दाेष हैं। मगर उनके परिजनों ने कहा कि ‘तुम जहां हो वहीं रहो और तुम्हें रांची आने की कोई जरूरत नहीं है।’
6 महीने बाद रांची पहुंची थी प्रीति
बता दें कि परिजनों ने प्रीति को मरा हुआ मान लिया था और प्रीति का अंतिम संस्कार तक कर दिया था। फोन पर परिजनों से बातचीत के लगभग 6 महीने बाद प्रीति रांची पहुंची थी।
समाजसेवी राजीव सिंह ने सच्चाई से उठाया पर्दा
इस पूरे प्रकरण में यदि समाजसेवी राजीव सिंह ने उचित कदम नहीं उठाया होता और उस लड़की का पता नहीं लगाया होता तो इस मामले की पूरी सच्चाई से कभी भी पर्दा नहीं उठ पाता। प्रशासन इस पूरे मामले की तह तक कभी पहुंच ही नहीं पाता, और तीनों निर्दाेष लड़के आज उस जुर्म की सजा भुगत रहे होते जो उन्होंने कभी किया ही नहीं। मगर इसके बावजूद सबसे बड़ी विडंबना यह है कि निर्दाेष होते हुए भी तीनों लड़कों को लगभग डेढ़ साल की सजा काटनी पड़ी।
झारखंड हाईकोर्ट ने पीड़ित के परिजनों को 5 लाख मुआवजा देने का दिया निर्देश
बता दें कि समाजसेवी राजीव सिंह के प्रयास और माननीय न्यायालय की उचित निगरानी के कारण आज तीनों लड़कों और उनके परिवार का मान सम्मान बरकरार है। इस पूरे मामले में पुलिस मुख्यालय के द्वारा आदेश जारी कर तत्कालीन अनुसंधानकर्ता समेत तीन इंस्पेक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया था। अब इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने झारखंड सरकार के गृहविभाग को आदेश दिया है कि पीड़ित और उनके परिजन को पांच लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। इस पूरे प्रकरण में सीआईडी ने बिना तथ्य जांचे युवकों की गिरफ्तारी की थी, हाई कोर्ट ने सख्त आदेश जारी करते हुए कहा कि बिना तथ्य और बिना जांच के किसी को भी जेल में रखना उचित नहीं है।
देखा जाए तो यदि कांके रोड निवासी समाजसेवी राजीव सिंह इस पूरे प्रकरण पर अपनी नजर बनाकर नहीं रखते और उस लड़की को नहीं ढूंढ़ते तो आज तीनों लड़के जेल में होते और और उनका परिवार शर्मिंदगी झेलते हुए घुट घुट कर मर रहा होता।
जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत में हुई सुनवाई
प्रीति हत्याकांड के फर्जी केस में जेल गए युवक की याचिका पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि बिना तथ्य और जांच के किसी को जेल में रखना सही नहीं है। इसलिए गृह विभाग पीड़ित युवक को हर्जाने के तौर पर पांच लाख रुपए दे। याचिकाकर्ता अजीत कुमार की याचिका पर कोर्ट ने निर्देश दिया। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए।
15 फरवरी 2014 को लापता हो गई थी प्रीति
बता दें कि रांची के चुटिया की रहने वाली प्रीति 15 फरवरी 2014 को लापता हो गई थी। इसके एक दिन बाद यानि 16 फरवरी 2014 को युवती का शव बुंडू थाना क्षेत्र के मांझी टोली से जला हुआ शव मिला था। जब युवती के शव का पोस्टमार्टम हुआ तब खुलासा हुआ कि हत्या के बाद शव जला दिया गया था। पुलिस ने प्रीति के परिजनों को शव की शिनाख्त करने को कहा। इसके बाद पुलिस ने डीएनए जांच कराए बिना मान लिया था कि शव प्रीति का है और पुलिस ने धुर्वा के अजीत कुमार, अमरजीत कुमार व अभिमन्यु को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
बिना जांचे पुलिस ने युवकों को किया था गिरफ्तार
गौरतलब है कि प्रीति हत्याकांड की जांच में सीआईडी ने बिना जांचे ही युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद इस केस के अनुसंधानकर्ता सुरेंद्र कुमार, तत्कालीन चुटिया थाना प्रभारी कृष्ण मुरारी और तत्काीन बुंडू थाना प्रभारी संजय कुमार को निलंबित कर दिया गया था।










