केंद्रीय सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में बेरोजगारी में लगातार वृद्धि हो रही है। 2023-24 में गैर-कृषि नौकरियों की संख्या 50% पर स्थिर रही, जो 2018-19 में 57.22% थी। यह आंकड़े राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) की रिपोर्ट में सामने आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में झारखंड के दौरे के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सरकार पर विकास कार्यों को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य और उसके लोगों के विकास को अवरुद्ध कर दिया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान JMM सरकार के कार्यकाल में रोजगार विनिमय के माध्यम से नियुक्तियों में भारी गिरावट आई है। एनडीए सरकार के दौरान 10,450 नियुक्तियों की तुलना में, JMM सरकार के तहत यह संख्या घटकर 1,420 रह गई है। इसके अलावा, नौकरी चाहने वालों का पंजीकरण भी 4.60 लाख से घटकर 2.04 लाख हो गया है। हेमंत सोरेन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनकी सरकार रोजगार सृजन के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और डिजिटल पोर्टल्स और रोजगार विनिमय का उपयोग कर रही है।
जनता में इस मुद्दे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि बेरोजगारी की समस्या केवल राज्य सरकार की नीतियों से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती है। सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए विशेष टीमों का गठन किया है और रोजगार सृजन के लिए नई योजनाओं की घोषणा की है। हेमंत सोरेन ने जनता से धैर्य रखने की अपील की है और कहा है कि उनकी सरकार बेरोजगारी की समस्या को गंभीरता से ले रही है और इसे हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।










