झारखंड के राज्यपाल को विधानसभा द्वारा विधेयकों को संविधान के अनुच्छेद 200के अनुरूप लौट के अनुरोध के संबंध में राज्य समन्वय समिति के द्वारा चिठ्ठी भेजी गई है।
चिट्ठी में लिखा गया है कि विषम गुरु श्री शिबू सोरेन ने महाजनों एवं सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ी जिसके फलस्वरूप रूप झारखंड अलग राज्य का गठन हुआ। इस लड़ाई में लाखों आंदोलनकारी शामिल हुए और शहीद निर्मल महतो जैसे उनके साथियों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह लड़ाई ना केवल राज्य के आदिवासी मूलवासी को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए था बल्कि झारखंडी अस्मिता एवं पहचान से भी जुड़ा हुआ था।
आप अवगत है कि दिसंबर 2019 में अपार जन समर्थन पाकर झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस एवं राष्ट्रीय जनता दल की गठबंधन सरकार ने मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में कार्य करना प्रारंभ किया। वर्तमान गठबंधन सरकार पहले दिन से ही आदिवासी दलित पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर उनके समग्र विकास एवं कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं को हम भी जामा पहना रही है।

वर्तमान गठबंधन सरकार ढिशुम गुरु श्री शिबू सूर्य एवं शहीद निर्मल महत्व जैसे अनेकों आंदोलनकारी के सपने को सरकार करने हेतु कृत संकल्पित है। इसी कड़ी में सरकार ने तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को विधानसभा से पारित कर कर राज्यपाल सचिवालय को अनुमोदन हेतु भेजा है। इन विधायकों को यहां न केवल लोगों की अस्मिता एवं पहचान से जुड़ी है बल्कि यहां के लोगों के हक और अधिकार भी इनसे जुड़े हैं।
चिट्ठी में राज्यपाल से कहा गया है कि सरकार इन तीनों विधेयकों को पुनः विधानसभा से पारित कर कर स्वीकृति हेतु स्थापित करना चाहती है जिसके लिए राज्यपाल उक्त तीनों विधेयकों को वापस करने की कृपा करें।










